राजसमंद–जैन कनेक्ट संवाददाता | राजसमंद स्थित भिक्षु बोधिस्थल में एक विशेष आध्यात्मिक मिलन का साक्षी बना, जब आचार्य महाश्रमण के आज्ञानुवर्ती मुनि सुरेश कुमार व गुजरात से पधारे मुनि निकुंज कुमार का आत्मिक संगम हुआ। इस पुण्य अवसर पर जैन श्रावक-श्राविकाओं ने श्रद्धा भाव से संतों का स्वागत किया और प्रवचन से प्रेरणा ग्रहण की। कार्यक्रम में कई संतों ने धर्म के विविध आयामों पर प्रकाश डाला और समाज को नैतिकता, करुणा और संयम के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
🌸 मुनि सुरेश कुमार का राजसमंद प्रवास भिक्षु बोधिस्थल में मुनि सुरेश कुमार का प्रवास संतत्व की अनुभूति से सराबोर रहा।
🚶♂️ मुनि निकुंज कुमार का शुभ आगमन गुजरात से लंबी यात्रा कर पहुंचे मुनि निकुंज कुमार का भावभरा स्वागत किया गया।
🤝 संत मिलन का प्रेरणादायी क्षण
मुनियों के बीच हुए इस आध्यात्मिक मिलन ने उपस्थित जनसमुदाय को प्रेरणा से भर दिया।
📿 प्रवचनों से जीवन दर्शन की सीख मुनि सुरेश कुमार व अन्य संतों ने प्रवचन के माध्यम से संयमित जीवन की महत्ता बताई।
🌟 मुनि संबोध कुमार का काव्यमय संदेश उन्होंने कहा, “संत वही जो ठोकर खाते पत्थर को भगवान बना दे”, इस पंक्ति ने सबको भावविभोर कर दिया।
🧘♂️ थकान को हरने वाला संत संग मुनि निकुंज कुमार ने कहा कि शांत वृंद के दर्शन से यात्रा की सारी थकावट मिट गई।
🎙️ अन्य संतों के उद्बोधन मुनि मादर्व कुमार, मुनि सिद्धप्रज्ञ व मुनि केवल्य कुमार ने भी मार्गदर्शन किया।
🌺 तेरापंथ समाज की सक्रिय भागीदारी तेरापंथ जैन समाज के पंकज मादरेचा ने बताया कि संतों के सान्निध्य से श्रद्धालु अत्यंत आनंदित हैं।
🎉 स्वागत समारोह की भव्यता भिक्षु बोधिस्थल के अध्यक्ष हर्ष लाल नवलखा व मंत्री सागरमल कावडिया ने संतों का सम्मान किया।
🕊️ मंगल भावना और नई ऊर्जा संतों की उपस्थिति से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया, और समाज को नवचेतना मिली।
इस आध्यात्मिक संगम ने राजसमंद को नई ऊर्जा से भर दिया। संतों के मधुर वचनों और मिलन की इस अनूठी घड़ी ने यह प्रमाणित किया कि संत मिलन केवल एक घटना नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नयन का अमूल्य अवसर है।

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