संत उदित मुनिजी का देवलोकगमन: मोक्षधाम तक निकली भावभीनी डोल यात्रा

रतलाम–जैन कनेक्ट संवाददाता | जैन समाज के लिए अत्यंत दुःखद समाचार के रूप में मंगलवार को संत उदित मुनिजी म.सा. का देवलोकगमन हो गया। हुक्म संघ के नवम पट्टधर, युग निर्माता और परमागम रहस्यज्ञ आचार्य रामेशजी के आज्ञानुवर्ती शिष्य, संत उदित मुनिजी ने जीवनपर्यंत संयम, ज्ञान और सेवा के मार्ग पर चलते हुए लाखों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक दिशा दी। मंगलवार प्रातः ही शासन दीपक आदित्य मुनिजी म.सा. ने उन्हें चौविहार संथारे का प्रत्याख्यान कराया, और फिर समता भवन, नोलाईपुरा, रतलाम से उनकी डोल यात्रा मोक्षधाम के लिए निकली। इस समाचार से समस्त साधुमार्गी जैन संघों एवं श्रावक समाज में शोक की लहर छा गई।

🔸 देवलोकगमन की शांत सुबह 🕊️ मंगलवार सुबह संत उदित मुनिजी म.सा. का शांतिपूर्वक महाप्रयाण हुआ, जिससे श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

🔸 संथारे का पावन प्रत्याख्यान 🙏 शासन दीपक आदित्य मुनिजी म.सा. ने स्वयं मंगलवार सुबह चौविहार संथारे का प्रत्याख्यान ग्रहण कराया।

🔸 डोल यात्रा का भावभीना आयोजन 🚩 दोपहर 2 बजे समता भवन, नोलाईपुरा, रतलाम से मोक्षधाम तक डोल यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।

🔸 हुक्म संघ के नवम पट्टधर 📿 संत उदित मुनिजी म.सा. आचार्य रामेशजी के शिष्य और हुक्म संघ की शृंखला के नवम पट्टधर थे।

🔸 श्रद्धांजलि में चार-चार लोगस्स 🛐 अखिल भारतवर्षीय साधुमार्गी जैन संघ और ब्यावर साधुमार्गी संघ समेत सभी श्रद्धालुओं ने चार-चार लोगस्स का ध्यान किया।

🔸 जैन समाज में शोक की लहर 🌑 संत के देवलोकगमन की खबर से ब्यावर, रतलाम समेत पूरे जैन समाज में शोक और श्रद्धा का वातावरण व्याप्त हुआ।

🔸 सामूहिक शोक प्रार्थनाएं 🕯️ सभी जैन संघों ने संत की आत्मा की शांति हेतु सामूहिक शोक प्रार्थनाएं आयोजित कीं।

🔸 समता भवन बना श्रद्धांजलि स्थल 🏛️ समता भवन, रतलाम में संत उदित मुनिजी के दर्शन हेतु श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

🔸 आध्यात्मिक जीवन की प्रेरणा 📘 संत उदित मुनिजी का जीवन संयम, तप और ज्ञान की मिसाल रहा, जिससे आज भी अनेक लोग प्रेरणा लेते हैं।

🔸 मोक्ष की राह पर अंतिम यात्रा 🌼 मोक्षधाम में संत की डोल यात्रा का समापन भक्ति, भजन और श्रद्धा के साथ किया गया।

संत उदित मुनिजी म.सा. का जीवन अहिंसा, त्याग और ज्ञान का प्रतीक था। उनका देवलोकगमन पूरे समाज के लिए अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी शिक्षाएं और जीवनदर्शन आने वाली पीढ़ियों को धर्म और संयम का पथ दिखाते रहेंगे।

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