सांचौर – जैन कनेक्ट संवाददाता | सांचौर नगर में चातुर्मास के पावन अवसर पर साध्वी विमलप्रभा जी की शिष्याएं – आरिका हेमरत्ना श्री, जयरत्नाश्री जी और नूतनप्रियाश्री जी का सान्निध्य प्राप्त हुआ। तीनों साध्वियों के नगर में आगमन पर श्रद्धालुओं ने जोरदार स्वागत किया। कुशल भवन से प्रारंभ हुई शोभायात्रा कुंथुनाथ जैन मंदिर तक पहुंची, जिसमें भक्ति, उल्लास और धर्ममय वातावरण का अनुपम संगम देखने को मिला।
🎉 शोभायात्रा का भव्य आयोजन ढोल-नगाड़ों और बैंड की मधुर धुनों के साथ नगर में निकली शोभायात्रा में श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए। महिलाएं लाल परिधानों में और पुरुष सफेद वस्त्रों में भक्ति भाव से लीन नजर आए।
🚩 बच्चों की विशेष भागीदारी छोटे-छोटे बच्चों ने हाथों में जैन धर्म के ध्वज लेकर शोभायात्रा में उमंग के साथ भाग लिया, जिससे धार्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।
🛕 मुख्य मार्गों से निकली शोभायात्रा यह यात्रा सब्जी मंडी, दरबार चौक और महावीर स्वामी मंदिर होते हुए पुनः कुशल भवन पहुंची, जहां मार्ग में जगह-जगह चावल से साध्वियों का स्वागत किया गया।
🙏 धर्मसभा का आयोजन कुशल भवन में आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं ने साध्वीवृंद के दर्शन कर पुण्य अर्जित किया। प्रकाश मालू ने स्वागत भाषण दिया, जबकि मंच संचालन केवलचंद बोहरा ने किया।
🤝 संघ का स्नेहपूर्ण स्वागत संघ अध्यक्ष दिलीपकुमार श्रीमाल ने साध्वीवृंद सहित सभी श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए संयम और साधना का संदेश दिया।
💐 श्रद्धालुओं ने किए चढ़ावे कई श्रद्धालु परिवारों ने भावपूर्ण चढ़ावे अर्पित किए, जिनमें बोथरा, मालू, कानूनगो परिवार प्रमुख रूप से सम्मिलित रहे।
📘 पवित्र ग्रंथों का चढ़ावा उत्तराध्ययन सूत्र और भीमसेन चरित्र जैसे धार्मिक ग्रंथों का चढ़ावा देकर श्रद्धालुओं ने साधना में सहभागिता जताई।
🗣️ साध्वियों का प्रेरणादायक प्रवचन साध्वीवृंद ने अपने प्रवचन में चातुर्मास को आत्मिक साधना, संयम और स्वाध्याय का सर्वोत्तम अवसर बताया तथा समाज को आत्मिक उत्थान का आह्वान किया।
🤲 चातुर्मास का बहुमान रिडमल घमंडीराम बोथरा कानूनगो परिवार द्वारा चातुर्मास का बहुमान किया गया, जिससे संघ में हर्ष का वातावरण बना।
📣 सभी का आभार कार्यक्रम के समापन पर संघ सचिव प्रकाश मरडिया ने सभी श्रद्धालुओं, व्यवस्थापकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
नगरवासियों के लिए यह चातुर्मास एक आध्यात्मिक पर्व जैसा बन गया है, जहां साध्वीवृंद का मार्गदर्शन समाज को संयम, श्रद्धा और सेवा के मार्ग पर अग्रसर कर रहा है। इस चातुर्मास के माध्यम से सांचौर धर्म, तप और स्वाध्याय की भूमि बन गया है।

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