आगर मालवा में साध्वी अक्षत नंदिता श्रीजी का चातुर्मास हेतु मंगल प्रवेश

आगर मालवा – जैन कनेक्ट संवाददाता | जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ, आगर मालवा के अंतर्गत चातुर्मास की पावन शुरुआत शुक्रवार को साध्वी अक्षत नंदिता श्रीजी सहित चार साध्वी भगवंतों के मंगल प्रवेश के साथ हुई। नगरवासियों ने भक्ति और श्रद्धा के साथ साध्वी मंडल की अगवानी की। ओसवाल जैन धर्मशाला से आरंभ हुई शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए इमली गली स्थित उपाश्रय तक पहुंची। जहां चातुर्मास के प्रथम प्रवचन में संयम, आत्मशुद्धि और ध्यान की महत्ता पर प्रकाश डाला गया।

🙏 चार साध्वी भगवंतों का मंगल प्रवेश साध्वी अक्षत नंदिता श्रीजी सहित चार साध्वी भगवंतों ने आगर मालवा में चातुर्मास हेतु नगर में प्रवेश किया।

🚶‍♀️ ओसवाल धर्मशाला से आरंभ हुई यात्रा शोभायात्रा ओसवाल जैन धर्मशाला से शुरू होकर हाटपुरा, सराफा बाजार, नाना बाजार होते हुए इमली गली उपाश्रय तक पहुंची।

🎶 महिला मंडल ने प्रस्तुत किए स्वागत गीत मार्ग में महिला मंडलों ने भावभीने गीतों के साथ साध्वी भगवंतों का स्वागत किया।

🌸 गऊली और पुष्पवर्षा से हुआ अभिनंदन स्थानीय महिलाओं ने जगह-जगह गऊली कर साध्वी भगवंतों का स्वागत किया, जिससे पूरा नगर भक्तिमय हो गया।

🪔 प्रवचन में संयम और आत्मशुद्धि पर बल साध्वी श्रीजी ने कहा कि चातुर्मास आत्मा के विकास का काल है, जिसमें संयम और आत्मचिंतन का अभ्यास किया जाता है।

🌿 वर्षा ऋतु का प्रतीकात्मक महत्व उन्होंने कहा जैसे धरती वर्षा में हरियाली से भर जाती है, वैसे ही चातुर्मास आत्मा को धर्म की ऊर्जा से भर देता है।

🧘‍♀️ एक ही स्थान पर धर्म-साधना वर्षा काल में अनगिनत जीवों की रक्षा हेतु साध्वी भगवंत एक ही स्थान पर रहकर तप, स्वाध्याय और साधना करती हैं।

📖 प्रतिदिन प्रवचन और स्वाध्याय आगामी चार महीनों तक प्रतिदिन प्रवचन और स्वाध्याय के माध्यम से नगरवासियों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

🙏 नगर में छाया आध्यात्मिक वातावरण चातुर्मास के प्रारंभ से ही नगर में भक्ति और संयम का वातावरण स्थापित हो गया है।

🎉 धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला शुरू इस अवसर से जुड़ी कई धार्मिक गतिविधियां और आयोजन नगर में आयोजित किए जाएंगे, जिससे समाज को अध्यात्म से जोड़ने का कार्य होगा।

साध्वी अक्षत नंदिता श्रीजी और उनके संघ का चातुर्मास आगर मालवा नगर के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मपरिष्कार का अवसर है। संयम, साधना और सत्संग से जुड़कर समाज आत्मकल्याण की ओर अग्रसर होगा।

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