रामगढ़ – जैन कनेक्ट संवाददाता | रामगढ़ शहर देशभक्ति और सेवा भाव से ओत-प्रोत उस समय दिखा जब तिरंगा यात्रा के दौरान जैन समाज ने न सिर्फ स्वागत किया, बल्कि समाजसेवा का आदर्श प्रस्तुत करते हुए यात्रियों के लिए जलपान की व्यवस्था भी की। जैन मंदिर के सामने लगे स्टॉल पर लोगों को पानी, गुड़ और चना वितरित किया गया। समाज के अध्यक्ष राजेंद्र चूड़ीवाल के नेतृत्व में जुलूस का स्वागत किया गया, जिसे देख सभी यात्रियों ने प्रशंसा की।
सचिव योगेश सेठी ने बताया कि जैन समाज सदैव राष्ट्रहित के कार्यों में अग्रणी रहा है। इस सेवा गतिविधि के साथ-साथ एक पुण्यार्जक रथ का भी मंदिर में आगमन हुआ, जो हरियाणा से अष्टापद तीर्थ से संबंधित है।
सेवा और श्रद्धा के मुख्य बिंदु 👇
🇮🇳 तिरंगा यात्रा का उत्साहपूर्वक स्वागत जैन मंदिर के समक्ष समाज के अध्यक्ष के नेतृत्व में यात्रा का जोशीले स्वागत से माहौल देशभक्ति से सराबोर हो गया।
💧 जलपान सेवा का आयोजन समाज द्वारा लगाए गए स्टॉल पर यात्रियों को शीतल जल, गुड़ व चना वितरित कर गर्मी से राहत दी गई।
👥 सेवा कार्य में सामूहिक सहभागिता समाज के कई वरिष्ठ और युवा सदस्यों ने सेवा कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाई।
🗣️ सेवा का आदर्श प्रस्तुत यात्रा में भाग लेने वालों ने जैन समाज की नि:स्वार्थ सेवा की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
🙏 राष्ट्र के प्रति निष्ठा का संदेश सचिव योगेश सेठी ने बताया कि समाज हमेशा देश के लिए अपने दायित्व को प्राथमिकता देता है।
🛕 हरियाणा से पुण्यार्जक रथ का आगमन जैन मंदिर में तीर्थयात्रा हेतु आए पुण्यार्जक रथ का श्रद्धा से स्वागत किया गया।
🗿 151 फीट ऊंची प्रतिमा निर्माण की जानकारी अष्टापद गुरुग्राम में मुनिसुव्रतनाथ की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा बन रही है, जिसकी जानकारी दी गई।
📢 धार्मिक प्रचार के साथ राष्ट्रसेवा का समन्वय धर्म और देशभक्ति का अद्भुत संगम इस आयोजन में देखने को मिला।
🙌 कार्यक्रम की सफलता में समाज की एकजुटता प्रमुख सदस्य जैसे राजू पाटनी, प्रवीण जैन, सुभाष सेठी आदि ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
🎉 पूर्व अध्यक्षों और वरिष्ठों की भागीदारी पूर्व अध्यक्ष माणिक जैन सहित कई वरिष्ठ सदस्य भी सेवा कार्य में जुटे रहे।
रामगढ़ की इस तिरंगा यात्रा में जैन समाज का योगदान केवल स्वागत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने सेवा, समर्पण और राष्ट्रीय कर्तव्य का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। यह आयोजन न केवल शहरवासियों के लिए प्रेरणा बना बल्कि जैन समाज की सामाजिक प्रतिबद्धता को भी उजागर किया।

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