जामनगर–जैन कनेक्ट संवाददाता | धर्मनगरी जामनगर के युवा प्रोफेसर हर्ष महेता ने सांसारिक जीवन को त्यागकर संयम के मार्ग पर चलने का निर्णय लिया है। 27 वर्षीय एम.कॉम. स्नातक हर्ष महेता 14 मई को जैन धर्म के पवित्र स्थल पालिताणा में दीक्षा लेंगे। इससे पूर्व 8 मई को जामनगर में आयोजित वर्षीदान समारोह और शोभायात्रा में भक्तों का विशाल जनसागर उमड़ पड़ा।
🙏 धर्ममार्ग की ओर युवा कदम हर्ष जयेशभाई महेता ने अपने प्रोफेशनल करियर को छोड़कर वैराग्य को अपनाया है और अब वह दीक्षा के माध्यम से आत्मकल्याण की ओर अग्रसर हैं।
👨👩👧👦 परिवार में दीक्षा की परंपरा हर्ष के परिवार के छह सदस्य पहले ही 2012 में दीक्षा ले चुके हैं, जिनमें उनकी फूईबा भी शामिल हैं, जिससे यह निर्णय एक पारिवारिक आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा बन गया है।
🚩 वर्षीदान की भव्य शोभायात्रा आज वर्षीदान की शोभायात्रा बड़े धूमधाम से निकली, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए और धार्मिक उत्साह देखने लायक था।
🕉️ परमात्मा पर शक्तिस्तव अभिषेक 8 मई को प्रातः 9:30 बजे श्री आदिनाथ परमात्मा पर शक्तिस्तव महाभिषेक का आयोजन हुआ, जिसमें धर्मप्रेमियों ने भाग लिया।
🏛️ शेठजी देरासर में विदाई समारोह रात्रि 8:30 बजे शेठजी देरासर में आयोजित विदाई समारोह में हर्ष महेता को श्रद्धालुओं ने भावभीनी विदाई दी।
🎤 प्रवचन और भक्ति संगीत की प्रस्तुति अमितभाई कोठारी ने प्रवचन सेवा दी और अमनभाई ने भक्ति संगीत की प्रस्तुति से माहौल को भावविभोर कर दिया।
🛕 14 मई को पालिताणा में दीक्षा दीक्षा विधि 14 मई को प्रातः 5 बजे गुरु हेमसंयम वाटिका, पालिताणा में शुरू होगी, जहां कई संतों की उपस्थिति रहेगी।
🚶♂️ गिरिविहार और अष्टोत्तरी अभिषेक 12 मई को पालिताणा में गिरिविहार और अष्टोत्तरी अभिषेक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें दीक्षा से पूर्व धार्मिक साधना होगी।
🕯️ आत्मशुद्धि हेतु विशेष आयोजन 8 मई को सुबह 9:30 बजे आत्मशुद्धिकारी शक्तिस्तव महाभिषेक का आयोजन हुआ, जिससे आध्यात्मिक वातावरण सघन हो गया।
🎊 साधर्मिक भक्तिभाव का प्रदर्शन बपोर 12 बजे साधर्मिक भक्तिभाव कार्यक्रम हुआ, जिसमें सभी ने संयम मार्ग की महिमा का गुणगान किया।
जामनगर के युवा प्रोफेसर हर्ष महेता का यह निर्णय न केवल उनके आत्मोन्नयन की दिशा में है, बल्कि आज के युवाओं के लिए भी एक प्रेरणा है कि अध्यात्म और संयम का मार्ग किसी भी आयु में अपनाया जा सकता है। वर्षीदान शोभायात्रा, अभिषेक और विदाई समारोह में उमड़ी आस्था इस आध्यात्मिक यात्रा की सफलता का प्रमाण है।

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