नई दिल्ली–जैन कनेक्ट संवाददाता | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शनिवार को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित जैन आचार्य विद्यानंद जी महाराज की जन्म शताब्दी समारोह के अवसर पर ‘धर्म चक्रवर्ती’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें संयम, करुणा और धर्म मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए प्रदान किया गया। पीएम मोदी ने इसे ‘प्रसाद’ मानकर स्वीकार करते हुए मां भारती को समर्पित किया। यह समारोह संस्कृति मंत्रालय एवं भगवान महावीर अहिंसा भारती ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
🔸 ‘धर्म चक्रवर्ती’ से अलंकृत हुए पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संत विद्यानंद की शताब्दी पर ‘धर्म चक्रवर्ती’ की उपाधि प्रदान की गई, जो एक धर्मपरायण शासक का प्रतीक है।
🔸 ‘प्रसाद’ मानकर सम्मान स्वीकार पीएम मोदी ने कहा कि वे स्वयं को इस सम्मान के योग्य नहीं मानते, परंतु संतों द्वारा दिया गया सब कुछ ‘प्रसाद’ होता है, जिसे उन्होंने मां भारती को समर्पित किया।
🔸 शताब्दी वर्ष का हुआ शुभारंभ यह आयोजन आचार्य विद्यानंद जी महाराज के जन्म शताब्दी वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, जो वर्षभर चलने वाली राष्ट्रीय श्रद्धांजलि श्रृंखला का भाग होगा।
🔸 प्रदर्शनी में झलकी जीवनगाथा प्रधानमंत्री ने “आचार्य श्री 108 विद्यानंद जी महाराज का जीवन और विरासत” नामक विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन किया, जिसमें दुर्लभ चित्र, पेंटिंग्स और लेख सामग्री शामिल थी।
🔸 ‘युग पुरुष’ और ‘युग दृष्टा’ का सम्मान पीएम मोदी ने आचार्य विद्यानंद को ‘युग पुरुष’ और ‘युग दृष्टा’ बताते हुए कहा कि उन्होंने उनके सान्निध्य से जीवन में कई बार मार्गदर्शन प्राप्त किया।
🔸 जैन ध्वज और प्रतीक के रचयिता आचार्य विद्यानंद ने 1975 में भगवान महावीर के 2500वें निर्वाण महोत्सव के दौरान जैन ध्वज और अहिंसा प्रतीक चिह्न का निर्माण किया था, जो आज सभी पंथों में स्वीकृत है।
🔸 आठ हजार आगम श्लोक कंठस्थ वे आधुनिक भारत के सबसे विद्वान जैन संतों में गिने जाते हैं, जिन्होंने 8000 से अधिक जैन आगमिक श्लोक कंठस्थ किए और 50 से अधिक ग्रंथों की रचना की।
🔸 बसोकुंड की पहचान कराई 1956 में आचार्य विद्यानंद ने बिहार स्थित बसोकुंड को भगवान महावीर की जन्मभूमि के रूप में प्रमाणित किया, जिसे भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से मान्यता दी।
🔸 विराट आयोजन में अनेक विशिष्ट अतिथि इस कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राष्ट्रसंत प्रज्ञासागर मुनिराज, सांसद, अनेक जैनाचार्य एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
🔸 स्मारक सिक्का, डाक टिकट और जीवन ग्रंथ विमोचित समारोह के दौरान आचार्य जी के जीवन पर आधारित ग्रंथ, एक स्मारक सिक्का एवं डाक टिकट भी जारी किए गए, जो उनकी विरासत को अमर बनाएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया गया ‘धर्म चक्रवर्ती’ सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि जैन परंपरा और भारतीय संस्कृति की वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक भी है। यह आयोजन आचार्य विद्याभानंद जी की आध्यात्मिक विरासत और समन्वयवादी दृष्टिकोण को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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