पिपलगोन (खरगोन) – जैन कनेक्ट संवाददाता | खरगोन जिले के पिपलगोन गांव में रविवार को जैन समाज के विशेष धार्मिक आयोजन – तीन दिवसीय विधान मंडल की शुरुआत हुई। इस आयोजन की विशेष बात यह रही कि यह मुनि पूज्य सागर जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हो रहा है, जो स्वयं पिपलगोन के मूल निवासी हैं। उनका जन्म, बाल्यकाल और शिक्षा यहीं हुई थी। वर्षों पूर्व गृहस्थ जीवन त्यागकर संयम मार्ग पर चलने वाले पूज्य सागर जी का अपने गांव आगमन एक आध्यात्मिक उत्सव में बदल गया।
🌸 ग्राम में हुआ मुनि पूज्य सागर जी का मंगल प्रवेश रविवार सुबह 8:30 बजे मुनि पूज्य सागर जी का पिपलगोन में भव्य स्वागत हुआ। बाजार चौक से शोभायात्रा निकली जो पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंची।
🏡 गृहस्थ जीवन के घर पहुंचे मुनि महाराज मंदिर दर्शन के बाद वे अपने गृहस्थ जीवन के घर पहुंचे, जहां परिवारजनों ने पाद प्रक्षालन और पूजन किया।
📚 पिपलगोन में ही हुआ प्रारंभिक शिक्षा और पालन-पोषण 3 जुलाई 1980 को जन्मे चक्रेश जैन (वर्तमान मुनि पूज्य सागर जी) ने गांव के स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई की थी।
🧘 सांसारिक से साधु जीवन की अद्भुत यात्रा 1998 में ब्रह्मचर्य व्रत, 2008 में क्षुल्लक दीक्षा और 2015 में मुनि दीक्षा प्राप्त कर संयम जीवन अपनाया।
🧴 पूजन और पाद प्रक्षालन की भक्ति से भरी रस्म माता विमला जैन, पिता सोमनाथ जैन और भाइयों ने श्रद्धा से मुनि पूज्य सागर जी का पाद प्रक्षालन किया।
🗣️ धर्मसभा और सम्मान समारोह का आयोजन दोपहर 2 बजे बाजार चौक में विशाल धर्मसभा और सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
🛕 तीन दिवसीय विधान मंडल की शुरुआत मुनि महाराज के सान्निध्य में तीन दिवसीय विधान मंडल आरंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए।
🧭 विहार के अगले पड़ाव: इंदौर में चातुर्मास विधान पूर्ण होने के बाद मुनि पूज्य सागर जी का विहार इंदौर की ओर होगा, जहां उनका चातुर्मास प्रस्तावित है।
👪 गांववासियों के लिए गर्व और भावुकता का क्षण ग्रामवासियों के लिए यह क्षण भावनात्मक रहा – जब उनके गांव का बेटा मुनि बनकर लौटा।
🔥 युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत मुनि पूज्य सागर जी का जीवन युवाओं के लिए संयम, त्याग और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक बन गया है।
तीन दिवसीय विधान मंडल का यह आयोजन पिपलगोन ग्राम के लिए एक ऐतिहासिक धार्मिक अवसर बन गया है। मुनि पूज्य सागर जी का गृहस्थ जीवन छोड़ संयम पथ पर चलना और फिर जन्मभूमि में आकर धर्मप्रवचन देना – यह गांव के लिए गर्व, श्रद्धा और प्रेरणा का संगम है।

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