टिमरनी – जैन कनेक्ट संवाददाता | हरदा जिले के टिमरनी नगर में दिगंबर जैन समाज द्वारा राजस्थानी लाल पत्थरों से बने भव्य मंदिर में पंचकल्याणक महामहोत्सव की शुभ शुरुआत हो चुकी है। डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस दिव्य मंदिर में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा विधि के अंतर्गत भगवान की प्रतिमा स्थापना के लिए एक सप्ताह तक चलने वाले आयोजन की शुरुआत भव्य शोभायात्रा के साथ की गई।
पंचकल्याणक महोत्सव, जो जैन धर्म की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में से एक है, पाषाण से भगवान बनने की प्रक्रिया को दर्शाता है। इस आयोजन में जन्म, तप, ज्ञान, मोक्ष आदि पंच संस्कारों को धार्मिक अनुष्ठानों, झांकियों और यात्राओं के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
👇 महोत्सव की प्रमुख झलकियाँ इस प्रकार हैं:
🚩 राजस्थानी लाल पत्थरों से बना भव्य मंदिर डेढ़ करोड़ की लागत से तैयार किए गए इस दिव्य मंदिर की वास्तुशिल्प और धार्मिक गरिमा नगरवासियों के लिए श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है।
👑 पंचकल्याणक की विधिवत शुरुआत धार्मिक परंपराओं के अनुसार पाषाण से भगवान की प्रतिमा स्थापित करने की प्रक्रिया पंचकल्याणक प्रतिष्ठा के माध्यम से प्रारंभ हुई।
🚶 भव्य शोभायात्रा से हुआ उद्घाटन शिविर की शुरुआत भगवान की चांदी के विमान पर सवारी करते हुए भव्य शोभायात्रा से की गई, जिसमें जन्म से मोक्ष तक के संस्कारों की झांकी निकाली गई।
🕊️ ध्वजारोहण और इंद्र-इंद्राणी की प्रतिष्ठा धार्मिक स्थल पर ध्वजारोहण, मंडप उद्घाटन और इंद्र-इंद्राणी द्वारा यज्ञमंडप में की गई विधिपूर्वक पूजा आयोजन का विशेष आकर्षण रही।
🌸 अमृतश्री कॉलेज परिसर बना अयोध्या नगरी भगवान का जन्मकल्याणक अमृतश्री कॉलेज को अयोध्या नगरी के रूप में सजाकर अत्यंत श्रद्धा और भक्ति से मनाया गया।
🐘 ऐरावत पर भगवान की झांकी सौधर्म इंद्र और इंद्राणी द्वारा भगवान को ऐरावत हाथी पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया, जिसने भक्तों को अद्भुत अनुभूति दी।
🪔 सुमेरु पर्वत पर हुआ अभिषेक पांडुकशिला पर सभी इंद्रों ने 1008 कलशों से भगवान का भव्य अभिषेक किया, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
🎶 धार्मिक संगीत के साथ निकली रथ यात्रा गजराज, रथयात्रा और कलश यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से निकली, जिसमें धार्मिक संगीत और श्रद्धालु जयघोष करते हुए चल रहे थे।
🙏 श्रद्धालुओं और वैश्य समाज की सहभागिता नगर के नागरिकों ने जगह-जगह पूजन और आरती से शोभायात्रा का स्वागत किया। वैश्य समाज ने भी आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाई।
🧘 मुनिश्री का प्रवचन: जीवन का आदर्श मुनिश्री निर्णयसागर महाराज ने जन्मकल्याणक की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए अहिंसा, संयम और तप के मूल्यों को जीवन का आधार बताया।
टिमरनी का यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूरे समाज को एक सूत्र में बाँधने वाली श्रद्धा की श्रृंखला बन गया है। समाज के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन सहित जिले भर से आए श्रद्धालुओं ने आयोजन को गरिमा प्रदान की। पंचकल्याणक की इस परंपरा ने टिमरनी को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया है।

Leave a Reply