निंबाहेड़ा में जिनशासन स्थापना दिवस पर निकली प्रभात फेरी

निंबाहेड़ा – जैन कनेक्ट संवाददाता | वैशाख सुदी 11 के पावन अवसर पर निंबाहेड़ा नगर में जिनशासन स्थापना दिवस को बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सकल जैन साधु-संत विहार ग्रुप के तत्वावधान में प्रभात फेरी का आयोजन किया गया, जो राजेन्द्र सुरी ज्ञान मंदिर से आरंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई श्री आदिनाथ जैन मंदिर सिटी पहुंची। प्रभात फेरी में समाजजनों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

🔔 प्रभात फेरी का शुभारंभ राजेन्द्र सुरी ज्ञान मंदिर से प्रातःकाल प्रभात फेरी की शुरुआत बैंड-बाजों के साथ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुईं।

🏳 ‘जिनशासन अमर रहे’ के गूंजते नारे यात्रा के दौरान समाजजन ‘जिनशासन अमर रहे’ और ‘जिनशासन का परचम लहरा दो’ जैसे नारों से वातावरण को गुंजायमान करते नजर आए।

🛕 श्री आदिनाथ जैन मंदिर में चेत्यवंदन प्रभात फेरी के समापन पर श्री आदिनाथ जैन मंदिर में चेत्यवंदन किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से आराधना की।

🚩 जैन ध्वज फहराकर जताई श्रद्धा मंदिर के शिखर पर समाजजनों द्वारा जैन ध्वज फहराया गया, जो जिनशासन की गौरवगाथा का प्रतीक बना।

📜 गौतम स्वामी व 11 गणधरों की दीक्षा का स्मरण इस दिन गुरु गौतम स्वामी सहित 11 गणधरों द्वारा महावीर स्वामी से दीक्षा लेने की ऐतिहासिक घटना को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।

🧘 महावीर स्वामी द्वारा 4400 शिष्यों को दिया प्रतिबोध धार्मिक व्याख्यान में बताया गया कि महावीर स्वामी ने इस दिन 4400 शिष्यों को धर्मोपदेश दिया था।

🌸 पावापुरी में श्री संघ की स्थापना का स्मरणोत्सव पावन पावापुरी में चतुर्विघ श्री संघ रूपी तीर्थ की स्थापना भी इसी दिन हुई थी, जिसे श्रद्धापूर्वक याद किया गया।

🤝 समाज के गणमान्यजनों की उपस्थिति कार्यक्रम में डॉ. जे.एम. जैन, अशोक तेजीवत, तखत सिंह सिंघवी सहित कई वरिष्ठजन उपस्थित रहे।

🎉 हाथों में जैन ध्वज लेकर किया सामूहिक सहभाग श्रावक-श्राविकाओं ने अपने हाथों में जैन ध्वज लेकर प्रभात फेरी में सहभागिता की, जिससे आयोजन में एकता और भक्ति का संदेश फैला।

🪔 विहार सेवा ग्रुप का आयोजन में सराहनीय योगदान प्रभात फेरी और आयोजन को सफल बनाने में विहार सेवा ग्रुप के संयोजक अतुल बोडाना और उनकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस आयोजन ने न केवल जिनशासन की गौरवशाली परंपरा को पुनः स्मरण कराया, बल्कि समाज में धार्मिक चेतना और सामूहिकता की भावना को भी सुदृढ़ किया। श्रद्धा, सेवा और समर्पण से भरपूर इस दिन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया।

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