भगवान नेमिनाथ निर्वाण लाडू महोत्सव धूमधाम से संपन्न

हाथरस – जैन कनेक्ट संवाददाता | हाथरस के नयागंज स्थित भगवान नेमिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ के निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में लाडू महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। ऐतिहासिक रूप से इस बार मंदिर में पहली बार दो शांतिधारा का आयोजन किया गया, जो श्रद्धालुओं के लिए एक अनूठा और आध्यात्मिक अनुभव रहा। इस विशेष अवसर का संचालन बाल पंडित विशाल जैन वेद के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ।

🔔 मूलनायक भगवान पर हुआ विशेष अभिषेक भगवान नेमिनाथ की प्रतिमा पर प्रथम अभिषेक की बोली डॉ. विनोद कुमार जैन और श्वेतांक जैन द्वारा लगाई गई, जिसमें भक्तिभाव की झलक स्पष्ट दिखी।

🕊️ मंदिर इतिहास में पहली बार दो शांतिधाराएं एक शांतिधारा मूलनायक भगवान की प्रतिमा पर और दूसरी प्रतिमा के सामने बाहर की गई, जो पहली बार हुआ आयोजन था।

💦 शांतिधारा की बोलियों में दिखा उत्साह पहली शांतिधारा की बोली कमलेश जैन ने लगाई जबकि दूसरी शांतिधारा की बोली जैन नवयुवक सभा अध्यक्ष उमाशंकर जैन द्वारा ली गई।

🪔 आरती की बोली में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी आरती की बोली उषा जैन, लवी जैन, ममता जैन, प्रियंका जैन, इला जैन समेत 13 श्रद्धालु महिलाओं द्वारा लगाई गई।

📚 जिनवाणी स्थापना की बोली भी उत्साह से भरी पिंकी जैन और हरीश जैन ने जिनवाणी विराजमान करने की बोली लगाई, जिसमें गहरी श्रद्धा झलकती रही।

🕉️ चार घंटे चले विधान में चढ़ाए गए अर्घ्य बाल पंडित विशाल जैन वेद ने विधान के दौरान सैकड़ों अर्घ्य चढ़वाकर श्रद्धालुओं को पूजा विधि का महत्व समझाया।

👥 गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष संदीप जैन, प्रबंधक अनिल जैन गुड्डू, मंत्री कमलेश जैन समेत कई प्रमुख समाजसेवी कार्यक्रम में शामिल हुए।

💃 भक्ति में झूमे श्रद्धालु पूरे कार्यक्रम में श्रद्धालु भक्ति में डूबे रहे और भजनों की धुन पर भावविभोर होकर नृत्य भी किया।

🛕 सामूहिक आयोजन की रही भव्यता पूरे महोत्सव का आयोजन सुनियोजित और भव्य था, जिसमें समाज के सभी वर्गों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

🌟 बाल पंडित विशाल जैन की विशेष भूमिका पूरे विधान का संचालन बाल पंडित विशाल जैन वेद ने अनुशासित और भावपूर्ण तरीके से किया, जो आकर्षण का केंद्र रहा।

इस ऐतिहासिक लाडू महोत्सव ने न केवल भगवान नेमिनाथ के निर्वाण दिवस की स्मृति को भव्यता प्रदान की, बल्कि श्रद्धालुओं को अध्यात्म, परंपरा और भक्ति का एक उत्कृष्ट संगम भी प्रदान किया।

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