नवादा – जैन कनेक्ट संवाददाता | नवादा में शनिवार को दिगम्बर जैन समाज के श्रद्धेय मुनि श्री विशल्य सागर जी महाराज का 48वां जन्मोत्सव बड़े ही भक्तिपूर्वक और भव्यता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देशभर से श्रद्धालु नवादा पहुंचे और गुरु वंदना में लीन होकर आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और गुरु चित्र अनावरण से हुआ, जिसके पश्चात प्रवचनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया।
जैन मंदिर परिसर में मुनिश्री की प्रेरणा से श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति यज्ञ का आयोजन भी किया जा रहा है, जो भारत-पाक तनाव के बीच शांति और सद्भाव का संदेश देता है। इस समारोह में जैन समाज के विभिन्न वर्गों ने एकजुट होकर सहभागिता निभाई और मुनिश्री को शास्त्र तथा पीछि अर्पित की गई।
🪔 दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन से की गई, जिससे माहौल में पावन ऊर्जा का संचार हुआ।
🖼️ गुरु चित्रों का अनावरण मुनि श्री के गुरु विराज सागर जी और विशुद्ध सागर जी के चित्रों का अनावरण कर आशीर्वाद स्वरूप स्मरण किया गया।
🎤 प्रवचन में अहिंसा और शांति का संदेश मुनिश्री ने भगवान महावीर के सिद्धांतों और वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर गहन प्रकाश डाला।
📜 शास्त्र और पीछि भेंट समाजजनों ने मुनि श्री को श्रद्धापूर्वक शास्त्र और पीछि भेंट कर उनकी चरण वंदना की।
🎼 महिलाओं द्वारा मंगलाचरण नवादा जैन समाज की महिलाओं ने मंगलाचरण प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बनाया।
🕊️ विश्व शांति महायज्ञ का संकल्प भारत-पाक तनाव को देखते हुए आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र विधान एवं विश्व शांति यज्ञ की शुरुआत की गई।
👨👩👧👦 देशभर से पहुंचे श्रद्धालु देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु इस विशेष अवसर पर नवादा पहुंचे और गुरु चरणों में उपस्थित हुए।
🎭 धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जैन परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
📚 शिक्षा और सुरक्षा पर जागरूकता सुरक्षित शनिवार कार्यक्रम के अंतर्गत छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया।
👥 शिक्षकों और समाज का सक्रिय योगदान विद्यालय और समाज के कई शिक्षकों व गणमान्यजनों ने आयोजन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस शुभ अवसर ने ना केवल धार्मिक वातावरण को जागृत किया, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय सरोकारों के प्रति चेतना भी जगाई। मुनि श्री के जन्मोत्सव ने श्रद्धा, सेवा, अहिंसा और विश्व शांति जैसे मूल्यों को पुनः जनमानस में स्थापित करने का कार्य किया।

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