उज्जैन-जैन कनेक्ट संवाददाता | उज्जैन के इंदौर रोड स्थित श्री महावीर तपोभूमि पर एक अभूतपूर्व और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण घटना घटी। 80 वर्षीय सागर महाराज, जो 2005 से आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज के संघ में जुड़े थे, को बुधवार दोपहर को मुनि दीक्षा दी गई। आश्चर्यजनक रूप से, दीक्षा के कुछ ही घंटों बाद गुरुवार रात ढाई बजे उन्होंने शांतचित्त समाधि मरण किया।
🔸 दीक्षा के कुछ ही घंटों में मोक्ष बुधवार को दोपहर में दीक्षा लेने के बाद गुरुवार रात 2:30 बजे मुनि पूज्यतीर्थ सागर महाराज ने अंतिम सांस ली।
🔸 श्री तपोभूमि पर ही हुआ समाधि मरण उज्जैन की पुण्य तपोभूमि पर दीक्षा और समाधि मरण होना जैन परंपरा में अद्वितीय माना जाता है।
🔸 डोले में तपोभूमि परिसर की परिक्रमा अंतिम संस्कार से पूर्व मुनि श्री को डोले में बैठाकर परिसर में घुमाया गया, आगे समाजजन पिच्छि और कमंडल लेकर चले।
🔸 आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने किया मंत्रोच्चार आचार्य श्री ने मंत्रोच्चार के साथ परिक्रमा कराई और सम्पूर्ण विधि धर्मानुसार सम्पन्न करवाई।
🔸 सल्लेखना पूर्वक प्राप्त किया समाधि मरण मुनि श्री ने शांत चित्त, गुरु आज्ञा में रहते हुए सल्लेखना के साथ देह त्याग किया।
🔸 देशभर से जैन समाज की उपस्थिति देशभर से बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु मुनि श्री की अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
🔸 धार्मिक सामग्री से हुआ अभिषेक जल, दूध, घी, दही, चंदन, औषधि व कपूर से विधिपूर्वक अभिषेक किया गया।
🔸 संघ के प्रमुख पदाधिकारी रहे उपस्थित अशोक जैन चायवाला, दिनेश जैन, संजय बड़जात्या, देवेन्द्र सिंघी और इंदरमल जैन सहित कई पदाधिकारी मौजूद थे।
🔸 दीक्षा के बाद मिला नया नाम दीक्षा के पश्चात सागर महाराज का नया नाम मुनि पूज्यतीर्थ सागर महाराज रखा गया।
🔸 आचार्य श्री के सानिध्य में अंतिम श्वास आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज के अनुसार, मुनि श्री ने उनकी ही शरण में अंतिम श्वास ली।
इस विशेष घटना ने जैन समाज को एक बार फिर धर्म की गहराई और गुरु-शिष्य परंपरा की श्रेष्ठता का अनुभव कराया। एक साधक का दीक्षा के तुरंत बाद मोक्ष की ओर प्रस्थान करना अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। श्री तपोभूमि ने इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनते हुए एक गूढ़ आध्यात्मिक क्षण को जीवंत कर दिया।

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