देवली में मुनि प्रणीत सागर और क्षुल्लक विधेय सागर के आगमन पर निकला जुलूस

देवली – जैन कनेक्ट संवाददाता | देवली शहर ने जैन मुनि प्रणीत सागर महाराज और क्षुल्लक विधेय सागर महाराज के आगमन पर भक्ति और उल्लास से भरे माहौल में स्वागत किया। जहाजपुर चुंगी नाके से देवली में प्रवेश करते ही वर्षा की फुहारों ने मानो आकाश से आशीर्वाद बरसाया। श्रद्धालुओं ने बैंड-बाजों, जयघोषों और भजनों के साथ जुलूस निकालते हुए मुनिसंघ का अभिनंदन किया। चातुर्मास के लिए शांतिनाथ मंदिर और पार्श्वनाथ धर्मशाला तक शोभायात्रा भव्य रूप में संपन्न हुई।

🌧️ वर्षा के साथ हुआ पावन आगमन मुनि प्रणीत सागर महाराज और क्षुल्लक विधेय सागर महाराज के प्रवेश पर इन्द्रदेव ने वर्षा से स्वागत किया।

🚶‍♂️ चुंगी नाके से शुरू हुआ जुलूस जहाजपुर चुंगी नाके से चन्द्रप्रभु मंदिर तक निकाले गए जुलूस में बड़ी संख्या में श्रद्धालु नाचते-गाते शामिल हुए।

🛕 नगर के प्रमुख मंदिरों में दर्शन संघ ने सदर बाजार, चन्द्रप्रभु मंदिर, महावीर मंदिर होते हुए शांतिनाथ मंदिर तक विहार किया और दर्शन किए।

🌼 पार्श्वनाथ धर्मशाला में मंगल प्रवेश चातुर्मास स्थल पार्श्वनाथ धर्मशाला में मुनिसंघ का विधिवत स्वागत और प्रवेश संपन्न हुआ।

🪔 पादप्रक्षालन और शास्त्र भेंट समाज के विभिन्न मंदिरों के अध्यक्षों और चातुर्मास समिति पदाधिकारियों ने पादप्रक्षालन कर शास्त्र भेंट किए।

🖼️ चित्र अनावरण से सभा की शुरुआत धर्मसभा की शुरुआत शांतिनाथ भगवान, विरागसागर महाराज और विशुद्ध सागर महाराज के चित्र अनावरण से हुई।

🔥 दीप प्रज्वलन और वंदना दीप प्रज्वलन के साथ मुनिश्री का विधिवत स्वागत किया गया और मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया।

🗣️ मुनिश्री का प्रेरक प्रवचन प्रवचन में मुनि श्री ने चातुर्मास के महत्व को समझाते हुए विनय, समर्पण और अनुशासन की आवश्यकता बताई।

🎤 काव्यमयी गुरुभक्ति की प्रस्तुति क्षुल्लक विधेय सागर महाराज ने कवितामयी शैली में गुरुभक्ति प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर किया।

🎶 मंगलाचरण और संचालन आशु और शिवानी जैन द्वारा मंगलाचरण किया गया, जबकि कार्यक्रम का संचालन सत्यनारायण जैन ने किया।

देवली में मुनि प्रणीत सागर और क्षुल्लक विधेय सागर के चातुर्मास आगमन ने समस्त नगर को धर्मरस से सराबोर कर दिया। श्रद्धालुओं का समर्पण, अनुशासन और भक्तिभाव इस आयोजन को एक ऐतिहासिक रूप प्रदान कर गया। धर्मसभा ने समाज को संयम, साधना और विनम्रता की सीख दी।

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