चौगान जैन मंदिर में मुनिश्री सुप्रभसागर महाराज का मंगल प्रवेश

बूंदी–जैन कनेक्ट संवाददाता | बूंदी के ऐतिहासिक चौगान जैन मंदिर में मंगलवार को आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संचार देखने को मिला, जब मुनिश्री सुप्रभसागर महाराज एवं मुनिश्री वैराग्यसागर महाराज का ससंघ मंगल प्रवेश हुआ। प्रातः 7:30 बजे जैसे ही आदिनाथ भवन में मुनिश्री का पदार्पण हुआ, समाजबंधुओं ने जयकारों और पाद प्रक्षालन के साथ उनका भव्य स्वागत किया। धर्मसभा में मुनिश्री ने जीवन को सही दिशा देने वाले प्रेरणादायक सूत्र दिए और सुखी जीवन की राह दिखाई।

🔸 भव्य मंगल प्रवेश 🙏 चौगान जैन मंदिर में प्रातःकालीन बेला में सुप्रभसागर महाराज का भव्य स्वागत किया गया। तालाबगांव से समाजबंधुओं ने विहार कराया और जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो गया।

🔸 धर्मसभा में आध्यात्मिक संदेश 📿 मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य को अधर्म का त्याग कर धर्म को आचरण में लाना चाहिए, तभी मोक्ष मार्ग की प्राप्ति संभव है।

🔸 शॉर्टकट से बचने की सलाह ⛔ “शॉर्टकट अपनाने वाला व्यक्ति लक्ष्य से भटक जाता है” – यह कहते हुए मुनिश्री ने जीवन में धैर्य और परिश्रम का महत्व समझाया।

🔸 परिवार का सम्मान है सफलता की कुंजी 👨‍👩‍👧‍👦 मुनिश्री ने बताया कि जो व्यक्ति माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करता है, वही सच्चे अर्थों में सफल होता है।

🔸 समाज में उत्साह का माहौल 🎉 मंगल प्रवेश के दौरान समाजबंधु बड़े उत्साह से शामिल हुए। जगह-जगह आरती उतारी गई और पाद प्रक्षालन के लिए होड़ मच गई।

🔸 प्रेरक जीवन सूत्र 💡 मुनिश्री ने कहा कि अपनी परिस्थितियों को समझकर चलने वाला व्यक्ति अधिक सुखी रहता है, न कि दूसरों की नकल करने वाला।

🔸 चादर के अनुसार पैर फैलाने की सीख 🛏️ “दूसरों को देखकर खर्च बढ़ाने से जीवन में संकट आता है” – मुनिश्री ने जीवन को संतुलन से जीने की प्रेरणा दी।

🔸 शांतिधारा एवं भक्ति यात्रा 🚩 नाहर का चौहट्टा स्थित पार्श्वनाथ मंदिर में शांतिधारा के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ भक्ति यात्रा निकाली गई, जो चौगान मंदिर पहुंची।

🔸 धर्मसभा का कुशल संचालन 🎤 सभा का संचालन राजकुमार जैन ने किया, वहीं दीप प्रज्वलन मंत्री योगेंद्र जैन व अन्य पदाधिकारियों ने किया।

🔸 समाजबंधुओं की सहभागिता 👥 युवा संगठन अध्यक्ष रोबिन कासलीवाल, सुरेंद्र छाबड़ा, ऋषभ टोंग्या समेत कई प्रमुख समाजबंधु इस आयोजन में शामिल हुए।

चौगान जैन मंदिर में संपन्न यह मंगलमय आयोजन समाज के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत रहा। मुनिश्री के उपदेशों ने यह स्पष्ट कर दिया कि सच्चा धर्म वही है जो जीवन को संतुलित, अनुशासित और आत्मिक रूप से समृद्ध बनाता है।

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