पठारी – जैन कनेक्ट संवाददाता | पठारी स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को भव्य धार्मिक आयोजन के अंतर्गत मूलनायक आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक 1008 पावन मंत्रों के साथ अत्यंत श्रद्धा व भक्ति भाव से संपन्न हुआ। इस अद्भुत अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए और प्रभु का महाअभिषेक कर आत्मकल्याण की भावना से सराबोर हो उठे। धर्मसभा का आयोजन मुनि श्री दुर्लभ सागर महाराज के सान्निध्य में हुआ, जिसमें उन्होंने धर्म, भक्ति और तप की महत्ता पर प्रेरणादायक विचार रखे।
📿 1008 मंत्रों के साथ हुआ महामस्तकाभिषेक भगवान आदिनाथ के मस्तक पर श्रद्धा और पवित्रता के साथ 1008 मंत्रों से अभिषेक कर दिव्यता का अद्वितीय अनुभव किया गया।
🧘 मुनि श्री दुर्लभ सागर महाराज का सान्निध्य धर्मसभा में मुनि श्री ने जीवन की क्षणभंगुरता और धर्म की अनंत महिमा पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन प्रदान किया।
🕉️ बुद्धिमानों की पहचान बताया धर्म मुनिश्री ने कहा कि जो धर्म अवसर को पहचान लेते हैं, वे ही सच्चे ज्ञानी होते हैं — क्योंकि यह जीवन स्वयं में दुर्लभ है।
🙏 दान और पूजन से मिलती है शुद्धि उन्होंने कहा कि दान और अभिषेक से 24 घंटे के पाप धुलते हैं, और आत्मा को शांति मिलती है।
💰 धर्म में खर्च कुबेर का खजाना “एक बार धर्म में खर्च कर के देखो, मैं कुबेर का खजाना भर दूंगा” — इस मंत्रवाक्य से मुनिश्री ने समाज को धर्म के लिए प्रेरित किया।
🌺 श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब अजनास, इंदौर, खिमलासा, बीना, भानगढ़, मंडी बामोरा सहित अनेक नगरों से श्रद्धालुओं ने आकर प्रभु का दर्शन और मुनि संघ से आशीर्वाद लिया।
🪔 रजत परिकर को बताया सर्वश्रेष्ठ मुनिश्री ने कहा कि जिन प्रतिमा का अभिषेक रजत परिकर से हो, वह श्रेष्ठता की पराकाष्ठा होती है।
📖 पूजन से आत्मा का उत्थान पूजन के माध्यम से आत्मा को स्थिरता और शुद्धता मिलती है; यह जीवन का सबसे पुण्य कार्य है।
🌼 मुख्य शांतिधारा का सौभाग्य सिंघई परिवार को राकेश कुमार, मनोज कुमार, अनुज कुमार सिंघई परिवार ने मुख्य शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया।
👨👩👦 द्वितीय शांतिधारा सहेले परिवार द्वारा संपन्न आशा रानी, आशीष कुमार, अवनीश, अमित, रूपेश, नीतेश कुमार सहेले परिवार ने द्वितीय शांतिधारा की पुण्य भावना से संपन्न की।
यह दिव्य आयोजन न केवल जैन समाज के लिए, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का स्रोत बना। महामस्तकाभिषेक की इस अनुपम परंपरा में शामिल होकर श्रद्धालुओं ने भक्ति, सेवा और आत्मविकास के मार्ग को अपनाने का संकल्प लिया।

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