आचार्य विश्वरत्न सूरीश्वरजी से आशीर्वाद लेने पहुंचे मंत्री विजयवर्गीय

इंदौर–जैन कनेक्ट संवाददाता | इंदौर के कंचनबाग स्थित नील वर्णा जैन उपाश्रय ट्रस्ट में विराजमान जैन संत आचार्य विश्वरत्न सूरीश्वरजी महाराज से नगर विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शिष्टाचार भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान राष्ट्रधर्म, अहिंसा और भारतीय सेना की वीरता पर आधारित सारगर्भित चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए निर्णायक फैसलों और जैन सिद्धांतों के अद्भुत समन्वय को लेकर आचार्यश्री और मंत्री के बीच विशेष संवाद हुआ।

🔸 आशीर्वाद हेतु पहुंचे कैलाश विजयवर्गीय मंत्री विजयवर्गीय ने नील वर्णा जैन उपाश्रय में आचार्यश्री से आशीर्वाद प्राप्त कर राष्ट्रहित पर उनके विचार सुने।

🕊️ अहिंसा का वास्तविक अर्थ स्पष्ट किया आचार्यश्री ने कहा, “अहिंसा का अर्थ यह नहीं कि अन्याय का प्रतिकार न किया जाए।” धर्म में राष्ट्रधर्म सर्वोपरि है।

🇮🇳 राष्ट्रधर्म को बताया सर्वश्रेष्ठ उन्होंने बताया कि जहां राष्ट्रधर्म की निष्ठा होती है, वहां सुख, शांति और समृद्धि स्थायी रहती है।

✈️ युद्धविमान पर आधारित जैन सिद्धांत विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जैन धर्म के “क्षमा वीरस्य भूषणम्” सिद्धांत के अनुरूप युद्धविमान की घोषणा की।

💪 सेना को खुली छूट का साहसिक निर्णय उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने सेना को खुली छूट देकर पाकिस्तान को चार दिन में घुटनों पर ला दिया।

🎖️ देश ने सेना के शौर्य पर गर्व किया भारतीय सेना की वीरता पर पूरा देश गर्व महसूस करता है, और मोदी के नेतृत्व में एकजुटता आई है।

🕌 मंदिर निर्माण की जानकारी साझा ट्रस्ट अध्यक्ष विजय मेहता ने मंत्री को मंदिर निर्माण की प्रगति से अवगत कराया।

🤝 समाजजनों ने किया स्वागत कैलाश नाहार, रितेश ओसवाल, शैलेंद्र नाहर समेत अनेक समाजसेवियों ने मंत्री विजयवर्गीय का स्वागत किया।

🪔 जैन सिद्धांतों पर आधारित प्रेरणा प्रधानमंत्री की नीति को जैन विचारधारा के अनुरूप बताया गया, जो क्षमा और प्रतिकार के संतुलन पर आधारित है।

🌟 धर्म और राष्ट्रहित का सुंदर समन्वय पूरे कार्यक्रम में धर्म, नीति और राष्ट्रहित के उच्च आदर्शों की चर्चा हुई, जो प्रेरणादायक रही।

यह भेंट केवल एक राजनीतिक नेता की साधु संत से मुलाकात नहीं, बल्कि धर्म और राष्ट्र के उच्च आदर्शों के समन्वय का प्रेरक उदाहरण बनी। जैन सिद्धांतों के माध्यम से राष्ट्र की सुरक्षा और अहिंसा का संतुलन आज की आवश्यकता बन चुका है।

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