जोधपुर–जैन कनेक्ट संवाददाता | इस वर्ष 6 जुलाई को पड़ने वाली देवशयनी एकादशी के साथ ही शुभ कार्यों पर विराम और चातुर्मास की शुरुआत मानी जाएगी। इसी के साथ जैन संतों-साध्वियों की देशभर में विहार यात्राएं तेज़ हो गई हैं। जोधपुर नगर इस बार विशेष रूप से धार्मिक केंद्र बनता जा रहा है, जहां 30 से अधिक जैन संतों एवं साध्वियों का चातुर्मास हेतु मंगल प्रवेश प्रस्तावित है। समाज के अनेक संगठनों द्वारा संतों को निमंत्रण भेजे गए हैं और विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत की तैयारियां पूर्ण हो चुकी हैं।
📿 देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास की शुरुआत 6 जुलाई को देवशयनी एकादशी के बाद शुभ कार्यों पर विराम लगेगा और चार माह का चातुर्मास आरंभ होगा।
🛕 जोधपुर में 30 से अधिक संत-साध्वियों का आगमन जोधपुर में इस बार 30 से अधिक संतों का मंगल प्रवेश होगा, जो नगर में धर्म और साधना की सरिता बहाएंगे।
🚶 दिल्ली से भरतपुर होते हुए जोधपुर पहुंचेंगी साध्वियां साध्वी कल्पलता मसा आदि ठाणा 3 दिल्ली से 1200 किमी की यात्रा कर 5 जुलाई को पाल रोड पहुंचेंगी।
🌅 अमरनगर, भैरूबाग, प्रेमनगर सहित अनेक क्षेत्रों में चातुर्मास शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग साध्वी समूहों का चातुर्मास रहेगा, जिनमें भव्य धार्मिक आयोजन होंगे।
🎶 गुलाब नगर से दिग्विजयनगर तक शोभायात्रा साध्वी चंद्रकला का मंगल प्रवेश शुक्रवार को प्रेमनगर से शोभायात्रा के रूप में निकाला जाएगा।
🕊️ समता भवन, महामंदिर, सरदारपुरा में भी चातुर्मास आयोजन शासन दीपिका, पर्याय ज्येष्ठा, महासाध्वी कमलप्रभा जैसे संतों का चातुर्मास विभिन्न स्थानों पर सुनिश्चित हुआ है।
🛐 नानक संप्रदाय के संतों का भी होगा चातुर्मास 95 वर्षीय आचार्य अभयकुमार सहित नानक जैन श्रावक संघ के संतों का चातुर्मास महामंदिर में होगा।
🥁 विहार करते हुए डांगियावास तक पहुंचे संत अजमेर से विहार कर रहे संत अब डांगियावास तक पहुंच चुके हैं, जहां नगरवासियों ने स्वागत किया।
🧘 धार्मिक अनुष्ठानों की होगी भरमार रामनाम साधना शिविर, रामायण पाठ, भागवत कथा, अखंड वाणीजी पाठ जैसे अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।
📢 श्रद्धालुओं से की गई पुण्य अवसर पर उपस्थिति की अपील
सभी समाजजनों से इन धार्मिक आयोजनों में भाग लेने और संतों की कृपा प्राप्त करने का आग्रह किया गया है।
इस वर्ष जोधपुर का चातुर्मास न केवल धार्मिक उत्सव होगा, बल्कि नगर को चार महीनों तक आध्यात्मिकता, संयम और साधना का केंद्र भी बनाएगा। संतों का विहार और श्रद्धालुओं की सहभागिता से धर्म, सेवा और संस्कार की एक नई मिसाल स्थापित होगी।

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