जैन धर्म ने अमूल्य भूमिका निभाई : प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली–जैन कनेक्ट संवाददाता | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘नवकार महामंत्र दिवस’ के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में कहा कि जैन धर्म ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को गढ़ने में अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने जैन दर्शन की शिक्षाओं को आज की वैश्विक चुनौतियों का समाधान बताया और सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया कि वह इस प्राचीन विरासत के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

🔹 🙏 नवकार मंत्र दिवस पर भावपूर्ण संबोधन -प्रधानमंत्री ने इस दिन को आत्मिक जागरूकता और नैतिक चेतना का पर्व बताया।

🔹 🌍 जैन धर्म के मूल्यों की वैश्विक प्रासंगिकता– उन्होंने कहा कि जैन धर्म की शिक्षाएं आतंकवाद, युद्ध और पर्यावरणीय संकट से उबरने का मार्ग दिखाती हैं।

🔹 🔄 अनेकांतवाद को बताया समय की ज़रूरत -अनेक दृष्टिकोणों के सम्मान को बढ़ावा देने वाला यह सिद्धांत आज की दुनिया में बेहद अहम है।

🔹 🏛️ संसद भवन में जैन प्रभाव का उल्लेख -प्रधानमंत्री ने बताया कि संसद भवन की मूर्तियों में तीर्थंकरों की उपस्थिति जैन संस्कृति की गूंज है।

🔹 🌱 ‘मिशन लाइफ’ से जोड़ा जैन दर्शन -मोदी ने कहा कि जैन जीवनशैली पर्यावरण-अनुकूल और सतत विकास का आदर्श मॉडल है।

🔹 ✋ नौ जनभागीदारी प्रतिज्ञाओं की अपील -जल संरक्षण, पेड़ लगाना, स्वच्छता और योग जैसी नौ जीवन शैली आधारित प्रतिज्ञाएं लेने का अनुरोध किया गया।

🔹 🗿 जैन मूर्तियों की वापसी पर संतोष – अब तक विदेशों से 20 से अधिक प्राचीन जैन मूर्तियों की भारत वापसी सुनिश्चित की गई है।

🔹 🔗 जैन साहित्य को बताया आध्यात्मिक रीढ़ -प्रधानमंत्री ने इसे भारत की आध्यात्मिक समृद्धि और नैतिक चेतना का आधार कहा।

🔹 🚀 नवकार मंत्र को बताया विकास का पथ -मोदी ने कहा कि नवकार मंत्र का दर्शन एक आत्मनिर्भर और विकसित भारत की प्रेरणा है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह भाषण न केवल जैन धर्म की महान परंपरा को राष्ट्रीय सम्मान प्रदान करता है, बल्कि आधुनिक भारत के विकास की दिशा में इसे एक मार्गदर्शक शक्ति के रूप में प्रस्तुत करता है। उन्होंने जैन दर्शन को जीवनशैली, नीति और पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ते हुए एक नया दृष्टिकोण सामने रखा।

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