पंथवाद से ऊपर उठने की नई शुरुआत : जैन एकता की ओर बढ़ते कदम

मुंबई-जैन कनेक्ट संवाददाता | विले पार्ले (पूर्व), मुंबई में स्थित श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर पर बीएमसी की कठोर कार्रवाई ने जैन समाज की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया। इस घटना ने वर्षों से दिगंबर और श्वेतांबर पंथों के बीच चल रहे विवादों पर एकता की नई संभावनाओं का द्वार खोल दिया है। समाज के प्रमुख प्रतिनिधि पहली बार एक मंच पर आकर, तीर्थों को लेकर दशकों से चल रहे मतभेदों को सुलझाने के उद्देश्य से एकत्र हुए।

मुनीसुव्रतनाथ भगवान के ज्ञान कल्याणक के पावन अवसर पर दिनांक 22 अप्रैल 2025 को, दो पंथों के प्रतिनिधियों ने ढाई घंटे तक गंभीर चर्चा की। इस चर्चा से यह आशा जगी कि जैन समाज अब पंथवाद से ऊपर उठकर एक नए युग की ओर अग्रसर होगा।

🛕 मंदिर विध्वंस ने जगाई एकता की चेतना विले पार्ले में दिगंबर जैन मंदिर के ध्वंस ने समाज को झकझोरा और एकता की जरूरत को उजागर किया।

🤝 पंथों के प्रतिनिधियों की ऐतिहासिक बैठक श्वेतांबर और दिगंबर दोनों पंथों के प्रतिनिधियों ने एक ही मंच पर बैठकर विचार-विमर्श किया।

🕉️ मुनीसुव्रतनाथ के ज्ञान कल्याणक पर मिला मंच तीर्थंकर मुनीसुव्रतनाथ भगवान के ज्ञान कल्याणक अवसर पर संवाद की शुभ शुरुआत हुई।

🗣️ ढाई घंटे तक चली गंभीर चर्चा तीर्थों के विवादों पर विस्तृत चर्चा हुई, जिससे भविष्य में समाधान की दिशा स्पष्ट हुई।

🧘 पंथवाद से ऊपर उठने की पहल दशकों पुराने मतभेदों को छोड़, समाज के व्यापक हित में मिलकर काम करने की भावना प्रकट हुई।

👥 गुजरात के गृहमंत्री समेत कई प्रमुख उपस्थित हर्षभाई संघवी, सुधीरभाई मेहता, श्रीपाल भाई शाह, संतोष जी पेंढारी जैसे गणमान्य प्रतिनिधि चर्चा में शामिल हुए।

📜 सकल समाज के हित में सार्थक संवाद दोनों पक्षों ने जैन समाज के हित में वार्ता को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

🌐 तीर्थों के संरक्षण पर सहमति वार्ता का उद्देश्य न सिर्फ विवाद निपटाना था, बल्कि तीर्थों का संरक्षण और विकास भी सुनिश्चित करना रहा।

🚀 समाज को नई दिशा देने की प्रेरणा बैठक ने यह संकेत दिया कि भविष्य में पूरे जैन समाज को एकजुट करने की राह खुल चुकी है।

💬 जल्द ही उठाए जाएंगे ठोस कदम दोनों पक्षों ने आश्वस्त किया कि अब देरी नहीं होगी, ठोस निर्णय जल्द लिए जाएंगे।

यह ऐतिहासिक संवाद इस ओर इशारा करता है कि जैन समाज अब आंतरिक मतभेदों को पीछे छोड़कर एकता की दिशा में ठोस कदम उठाने को तैयार है। जब समाज एकजुट होगा, तभी तीर्थ सुरक्षित रहेंगे, और वही होगा सच्चा धर्मरक्षण।

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