नाशिक-जैन कनेक्ट संवाददाता | जैन समाज के विद्यार्थियों को प्राकृत, संस्कृत और जैन भाषाओं का अध्ययन सुलभ कराने के लिए जैन आर्थिक विकास महामंडल ने विशेष पहल की है। महामंडल के अध्यक्ष ललित गांधी ने नाशिक में आयोजित एक कार्यक्रम में संवाद करते हुए बताया कि जैन पाठशालाओं का सशक्तीकरण कर इन भाषाओं के ज्ञान को बढ़ावा दिया जाएगा। भगवान महावीर स्वामी के 2550वें निर्वाण कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित पुरस्कार समारोह में उन्होंने यह महत्वपूर्ण घोषणा की।
🔹 जैन भाषाओं का शिक्षण : जैन विद्यार्थियों के लिए प्राकृत, संस्कृत और जैन भाषाओं की शिक्षा विशेष पाठशालाओं के माध्यम से दी जाएगी।
📚 पाठशालाओं का सशक्तीकरण : जैन पाठशालाओं में आधुनिक सुविधाएं देकर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया जाएगा।
📖 मराठी में प्राचीन ग्रंथों का प्रचार : जैन समाज के प्राचीन ग्रंथों का मराठी भाषा में प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
📝 जैन मराठी विश्वकोश निर्माण : आगामी तीन वर्षों में जैन मराठी विश्वकोश तैयार कर प्रकाशित किया जाएगा।
🏡 जैन साधुओं के लिए निवास व्यवस्था : पैदल विहार करने वाले साधुओं के लिए उचित निवास सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
👩🏫 महिलाओं और शाला से बाहर के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा : महिलाओं और शाला से बाहर के विद्यार्थियों को प्राकृत, संस्कृत और अंग्रेजी भाषाओं का शिक्षण प्रदान किया जाएगा।
💰 एक लाख रुपये तक बिन ब्याज कर्ज : आर्थिक सहायता हेतु एक लाख रुपये तक का बिन ब्याज कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा।
🏦 व्यक्तिगत व समूह कर्ज पर विशेष दरें : व्यक्तिगत स्तर पर 30 लाख और महिला बचत समूहों के लिए 50 लाख रुपये तक का कर्ज 3 से 6 प्रतिशत ब्याज दर पर दिया जाएगा।
🏛️ राज्यभर में कार्यरत कार्यालय : महाराष्ट्र के 36 जिलों में मौलाना आज़ाद आर्थिक विकास महामंडल के माध्यम से जैन महामंडल का कार्य संचालित हो रहा है।
📉 समाज के गरीब वर्ग को आर्थिक सहायता : जैन समाज की गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली 22 लाख आबादी को आर्थिक सहायता देकर सशक्त बनाने का प्रयास किया जाएगा।
ललित गांधी ने कहा कि जैन समाज की आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक उन्नति के लिए महामंडल प्रतिबद्ध है। पाठशालाओं का सशक्तीकरण इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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