लखनऊ–जैन कनेक्ट संवाददाता | श्रावण मास की कृष्ण पक्ष षष्ठी के पावन अवसर पर लखनऊ स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, डालीगंज में आध्यात्मिक उल्लास के साथ विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। उपाध्याय श्री 108 आदीश सागर जी मुनिराज की दिव्य उपस्थिति में मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ का विशेष अभिषेक और शांतिधारा की गई। श्रद्धालुओं ने भक्ति और संयम के संग शक्ति का अनुभव किया।
🙏 विशेष अभिषेक व शांतिधारा — भगवान पार्श्वनाथ का दिव्य अभिषेक और शांतिधारा मुनि श्री की उपस्थिति में सम्पन्न हुई।
📿 45वें श्लोक की आध्यात्मिक व्याख्या — मुनि श्री ने भक्तामर स्तोत्र के 45वें श्लोक पर गूढ़ विवेचन किया, आत्मा की शुद्धि को बताया असली सुख का मार्ग।
🔄 जन्म-जन्मांतर की भटकन पर चर्चा — उन्होंने कहा कि जीव स्वर्ग, नरक, तिर्यंच और मनुष्य योनि में विषय-कषायों के कारण भटकता रहता है।
🧘 संयम और साधना पर जोर — मुनिराज ने बताया कि केवल संयम और आत्मशुद्धि ही वास्तविक सुख प्रदान करते हैं।
🕉️ दैनिक जिनदर्शन का संदेश — मुनि श्री ने श्रावकों को प्रतिदिन जिनेन्द्र देव के दर्शन का संकल्प लेने को प्रेरित किया।
🍽️ दिन में एक बार आहार — वे चातुर्मास में केवल एक बार आहार लेकर साधना में लीन रहते हैं।
📆 मोक्ष कल्याणक की घोषणा — श्री जैन धर्म प्रवर्धनी सभा ने बताया कि 31 जुलाई को भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा।
🙌 श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति — कार्यक्रम में शहर और आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए।
📣 धर्म प्रवर्धन में मुनि श्री की भूमिका — मुनि श्री ने प्रवचनों द्वारा जैन धर्म के मूल तत्वों को सरल भाषा में जनमानस तक पहुँचाया।
📚 संस्कारों से परिपूर्ण आयोजन — समस्त आयोजन धार्मिक अनुशासन, भक्ति और संयम की प्रेरणा देने वाला रहा।
इस धार्मिक कार्यक्रम ने जैन समाज को आत्मचिंतन, संयम और साधना की ओर प्रेरित किया। मुनिराज आदीश सागर जी की उपस्थिति ने आयोजन को दिव्यता प्रदान की, और आने वाले मोक्ष कल्याणक महोत्सव के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह का संचार किया।
Source : Dainik Bhaskar

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