नेमीनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक की पूर्व संध्या पर भव्य आयोजन

शामली-जैन कनेक्ट संवाददाता | शामली स्थित श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भगवान श्री 1008 नेमीनाथ के मोक्ष कल्याणक की पूर्व संध्या पर विशेष आयोजन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महिला जैन मिलन तेजस्विनी के तत्वावधान में “निर्वाण लड्डू सजाओ प्रतियोगिता” का आयोजन हुआ, जिसमें जैन समाज की महिलाओं ने अत्यंत उत्साह और भक्ति भाव से भाग लिया। प्रतियोगिता के साथ-साथ प्रश्न मंच भी आयोजित किया गया, जिससे भगवान नेमीनाथ के जीवन से जुड़ी आध्यात्मिक जानकारी समाज के सभी वर्गों तक पहुंची।

🍩 निर्वाण लड्डू सजाओ प्रतियोगिता का आयोजन तेजस्विनी ग्रुप द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में महिलाओं ने अद्भुत कला कौशल का परिचय देते हुए सुंदर सजावट के लड्डू प्रस्तुत किए।

🎨 कलात्मक आकृतियों में दिखी धार्मिक भावना प्रतिभागियों ने समशरण, पंचमेरु, नंदीश्वर द्वीप और जिनालय जैसे धार्मिक प्रतीकों के लड्डुओं का सृजन कर धार्मिक आस्था को कलात्मक रूप दिया।

🏆 प्रतियोगिता में विजेताओं की घोषणा इस प्रतियोगिता में शौन को प्रथम स्थान, अजन को द्वितीय स्थान और सुधा जैन को तृतीय स्थान मिला, वहीं पाँच प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार दिए गए।

📚 नेमीनाथ भगवान पर प्रश्न मंच कार्यक्रम में भगवान नेमीनाथ के जीवन और सिद्धांतों पर आधारित प्रश्न मंच का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों और बड़ों ने समान रुचि दिखाई।

🧕 जैन समाज की महिलाओं की विशेष भागीदारी महिला जैन मिलन तेजस्विनी की प्रेरणा से बड़ी संख्या में महिलाओं ने प्रतियोगिता में भाग लेकर आयोजन को सफल बनाया।

🛕 धार्मिक वातावरण में समर्पण भाव पूरा मंदिर परिसर भक्ति, ज्ञान और सेवा भाव से ओतप्रोत नजर आया। श्रद्धालुओं की सहभागिता ने आयोजन को विशिष्ट स्वरूप प्रदान किया।

👥 समारोह में समाज के प्रमुख पदाधिकारी रहे उपस्थित कार्यक्रम में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष कमल जैन, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष वीरांगना मोनिका जैन और शाखा अध्यक्ष वीरांगना दीपा जैन सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।

💬 महिलाओं के प्रयासों की सराहना कार्यक्रम में महिलाओं द्वारा दिखाए गए समर्पण और रचनात्मकता की सभी वरिष्ठ सदस्यों द्वारा प्रशंसा की गई।

💡 बालिकाओं ने भी दिखाई विशेष रुचि इस आयोजन में छोटी बच्चियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेकर धार्मिक संस्कारों के प्रति अपनी जिज्ञासा दिखाई।

🌺 भक्ति और सौंदर्य का संगम प्रतियोगिता ने एक ओर जहाँ धार्मिकता का भाव जागृत किया, वहीं दूसरी ओर कला और रचनात्मकता को भी मंच प्रदान किया।

यह आयोजन जैन समाज की एकजुटता, स्त्री शक्ति की भागीदारी और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल रहा।

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