हमारे तीर्थ और धर्म दोनों ही असुरक्षित: सुरेश जैन ऋतुराज

मेरठ-जैन कनेक्ट संवाददाता | मेरठ के शारदा रोड स्थित महावीर जयंती भवन में जैन मिलन महिला सरस्वती का स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, जहाँ जैन समाज के प्रमुख सुरेश जैन ऋतुराज ने धर्म और तीर्थों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज हमारे तीर्थस्थल और साधु-संत दोनों ही असुरक्षित हैं, और इनके संरक्षण के लिए समाज को एकजुट होने की आवश्यकता है।

🗣️ <strong>तीर्थ और धर्म की पहचान</strong> सुरेश जैन ऋतुराज ने स्पष्ट किया कि किसी भी धर्म की पहचान उसके तीर्थस्थलों और साधु-संतों से होती है, और वर्तमान में ये दोनों ही असुरक्षित हैं।

🚨 <strong>तीर्थों पर अतिक्रमण</strong> उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि जैन तीर्थों पर लगातार अतिक्रमण और अवैध कब्जे हो रहे हैं, जिससे उनकी पवित्रता और महत्व खतरे में है।

🤝 <strong>संरक्षण की जिम्मेदारी</strong> ऋतुराज ने समाज से आह्वान किया कि तीर्थों के संरक्षण की जिम्मेदारी हम सभी की है और इसके लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

🗓️ <strong>जैन तीर्थ रक्षा सम्मेलन</strong> इस गंभीर मुद्दे पर विचार-विमर्श और समाधान हेतु 2 जून को हस्तिनापुर में एक महत्वपूर्ण जैन तीर्थ रक्षा सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।

🙏 <strong>आचार्य वसुनंदी जी महाराज का सानिध्य</strong> यह सम्मेलन आचार्य वसुनंदी जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित होगा, जिससे इसकी महत्ता और बढ़ जाती है।

👥 <strong>अधिक से अधिक संख्या में पहुँचने का आग्रह</strong> सुरेश जैन ऋतुराज ने सभी जैन धर्मावलंबियों से अपील की कि वे इस सम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँ।

📖 <strong>जैन मिलन के स्थापना दिवस का महत्व</strong> स्थापना दिवस कार्यक्रम में जैन मिलन के उद्देश्यों और समाज में इसकी भूमिका के विषय में भी विस्तार से बताया गया।

🎤 <strong>सुरभि जैन द्वारा सभा संचालन</strong> सभा का संचालन सुरभि जैन ने कुशलतापूर्वक किया, जिससे कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हुआ।

👩‍👧‍👧 <strong>महिला सदस्यों का सहयोग</strong> कार्यक्रम को सफल बनाने में दीपाली, पारुल, दीपा, निहारिका और अन्य महिला सदस्यों का विशेष सहयोग रहा।

🛡️ <strong>धर्म और तीर्थों की सुरक्षा एक चुनौती</strong> वर्तमान समय में धर्म और तीर्थों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है, जिसके लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करना होगा।

यह स्थापना दिवस केवल एक उत्सव नहीं था, बल्कि धर्म और तीर्थों की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंतन का एक मंच भी था। सुरेश जैन ऋतुराज के शब्दों ने समाज को अपने धार्मिक धरोहरों के प्रति जागरूक किया और उनके संरक्षण के लिए एकजुट होने की प्रेरणा दी।

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