जयपुर में भगवान आदिनाथ का गर्भ कल्याणक महोत्सव सम्पन्न

जयपुर – जैन कनेक्ट संवाददाता | जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का गर्भ कल्याणक महोत्सव जयपुर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ। शहरभर के दिगंबर जैन मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन हुए, जिनमें श्रद्धालुओं ने भगवान की भक्ति में लीन होकर आत्मकल्याण की भावना को साकार किया। शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र, जगतपुरा रोड पर हुए विशेष आयोजन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया।

🌅 भगवान आदिनाथ का गर्भ कल्याणक महोत्सव सम्पन्न शहर के विभिन्न दिगंबर जैन मंदिरों में प्रभु के गर्भ कल्याणक की स्मृति में विशेष पूजन और भक्ति कार्यक्रम आयोजित हुए।

🕉️ मंत्रोच्चार और शांतिधारा से प्रारंभ प्रभात काल में मंदिरों में मंत्रोच्चार, अभिषेक और शांतिधारा के साथ भक्तों ने भगवान को अर्घ्य अर्पित किया।

📿 प्राचीन प्रतिमा का अभिषेक जगतपुरा रोड स्थित शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भूगर्भ से प्राप्त 1000 वर्ष पुरानी भगवान आदिनाथ की प्रतिमा का विशेष अभिषेक हुआ।

👥 समाज श्रेष्ठियों का नेतृत्व विनोद जैन कोटखावदा और कमल वैद के नेतृत्व में महोत्सव का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

🕯️ अष्ट द्रव्यों से पूजन और महाआरती भक्तों ने अष्ट द्रव्यों से पूजन किया और जयकारों के साथ महाआरती में भाग लिया।

🏛️ अनेक मंदिरों में विशेष आयोजन चूलगिरी, सिरमोरियान, बड़ा दीवान जी, संघीजी, एसएफएस, मीरा मार्ग और सूर्य नगर के जैन मंदिरों में भी विशेष कार्यक्रम हुए।

📆 आगामी कल्याणक दिवसों की घोषणा 17 जून को वासुपूज्य का गर्भ कल्याणक व विमलनाथ का मोक्ष कल्याणक और 20 जून को नमिनाथ का जन्म व तप कल्याणक मनाया जाएगा।

🍘 निर्वाण लाडू चढ़ाए जाएंगे कल्याणक दिवसों पर निर्वाण लाडू चढ़ाकर मोक्ष की भावना का प्रतीकात्मक पूजन होगा।

📖 कल्याणक पर्वों का आध्यात्मिक महत्व तीर्थंकरों के जीवन की घटनाएं जीवों के कल्याण का कारण बनती हैं, इसी भावना से इन पर्वों को श्रद्धा से मनाया जाता है।

🪔 भक्ति से आत्मशुद्धि की प्रेरणा इन पर्वों के माध्यम से आत्मा की शुद्धि और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा प्राप्त होती है।

जयपुर में आयोजित यह महोत्सव न केवल धार्मिक आयोजन था, बल्कि आत्मिक उन्नयन और समुदाय की एकजुटता का भी प्रतीक रहा। भगवान आदिनाथ की 1000 वर्ष पुरानी प्रतिमा का पूजन इस अवसर को विशेष बनाता है। आगामी कल्याणक पर्वों के लिए समाजजन में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

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