गुरु पूर्णिमा पर्व पर पारसनाथ मंदिर में विशेष पूजन, श्रद्धा से गूंजा वातावरण

देवबंद-जैन कनेक्ट संवाददाता | देवबंद के श्री दिगंबर जैन पारसनाथ मंदिर, सारगवाड़ा में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और अध्यात्म से परिपूर्ण विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। इस अवसर पर 24 तीर्थंकरों के साथ-साथ आचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर जी महाराज और आचार्य श्री 108 अरुण सागर जी महाराज की भी पूजा विधिवत रूप से संपन्न हुई। कार्यक्रम में अनेक धार्मिक क्रियाएं, प्रवचन और संकल्पों के साथ गुरु भक्ति का भावपूर्ण प्रदर्शन देखने को मिला।

🪔 चित्र अनावरण से हुई शुरुआत कार्यक्रम की शुरुआत अंकित कुमार अविरल जैन द्वारा आचार्य पुष्पदंत सागर जी महाराज के चित्र के अनावरण से हुई।

🕯️ दीप प्रज्वलन से सजी धार्मिक सभा महेश कुमार, अजय कुमार और संजय जैन ने दीप प्रज्वलित कर आयोजन को शुभारंभ प्रदान किया।

🛁 गुरु पाद पक्षालन का आयोजन आकाश कुमार, अभिषेक कुमार और प्रखर जैन ने श्रद्धापूर्वक गुरु पाद पक्षालन कर आस्था प्रकट की।

📚 शास्त्र भेंट की समर्पण भावना रविंद्र कुमार, रजत जैन और सजल जैन ने धर्मग्रंथ समर्पित कर गुरुभक्ति का संदेश दिया।

🧘‍♂️ प्रवचनों में गुरु पूर्णिमा का महत्व आचार्य अरुण सागर जी महाराज ने अपने प्रवचनों में गुरु पूर्णिमा की आध्यात्मिक गहराई और जैन धर्म में गुरु के स्थान को विस्तार से बताया।

🛕 24 तीर्थंकरों की पूजा-अर्चना श्रद्धालुओं ने जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों की भक्तिपूर्वक पूजा की और मोक्षमार्ग की प्रेरणा प्राप्त की।

🌼 गुरुओं को समर्पित विशेष आरती इस अवसर पर विशेष आरती का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तों ने भावपूर्ण भजन और स्तुतियों से वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

📍 तीन जिलों के श्रद्धालुओं की सहभागिता सरसावा, मुजफ्फरनगर और देवबंद के जैन समाज के लोगों ने इस विशेष आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

🧡 गुरु-शिष्य संबंधों का उत्सव श्रद्धालुओं ने इस दिन गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति श्रद्धा व्यक्त की और उनके उपदेशों के अनुरूप जीवन जीने का संकल्प लिया।

🕊️ गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक संदेश इस पर्व ने गुरु के महत्व को रेखांकित करते हुए जैन समाज को धर्म, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को और अधिक उजागर करता है। श्रद्धालुओं ने न केवल पूजा-अर्चना में भाग लिया, बल्कि जीवन में धर्म और नैतिकता को अपनाने का दृढ़ निश्चय भी लिया। यह पर्व जैन समाज की आध्यात्मिक चेतना को और अधिक सशक्त बनाने वाला सिद्ध हुआ।

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