सहारनपुर – जैन कनेक्ट संवाददाता | गुजरात के जूनागढ़ स्थित गिरनार पर्वत की पंचम टोंक पर जैन श्रद्धालुओं को पूजा से रोके जाने की घटना के विरोध में सहारनपुर में जैन समाज ने जोरदार प्रदर्शन किया। भारतीय जैन मिलन क्षेत्र संख्या-14 के प्रतिनिधियों ने सहारनपुर कलेक्ट्रेट पर एकत्र होकर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में शामिल जैन नेताओं ने इसे धार्मिक भावनाओं का गहरा अपमान बताते हुए तीखा विरोध जताया।
🔸 गिरनार पर पूजा से रोक 2 जुलाई 2025 को हज़ारों जैन श्रद्धालुओं को पंचम टोंक पर भगवान नेमीनाथ की पूजा से रोका गया, जिससे समाज में गहरा आक्रोश है।
🛑 जयकारा और सामग्री पर पाबंदी श्रद्धालुओं को धार्मिक जयकारा लगाने और पूजन सामग्री चढ़ाने से भी रोका गया, जिससे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन हुआ।
🚔 पुलिस चेकिंग और सामग्री जब्ती गिरनार पर्वत पर पुलिस ने 10 से अधिक चेकिंग प्वाइंट बनाए और श्रद्धालुओं की पूजन सामग्री ज़ब्त कर ली।
🚺 महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार के आरोप प्रदर्शनकारियों ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की भी शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिससे नाराज़गी और बढ़ी।
📜 ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगे प्रदर्शन में जैन समाज ने तीन मांगें रखीं — अवैध दत्तात्रेय मूर्ति हटाई जाए, एएसआई के नियमों का पालन हो और पंचम टोंक को राष्ट्रीय जैन धरोहर घोषित किया जाए।
🏛 सरकारी दस्तावेज़ों में जैन तीर्थस्थल की मान्यता जैन नेताओं ने बताया कि ASI और गुजरात गजेटियर दोनों ही पंचम टोंक को प्राचीन जैन तीर्थस्थल मानते हैं।
⚖️ गुजरात हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना प्रदर्शनकारियों ने बताया कि 2005 में गुजरात उच्च न्यायालय ने पंचम टोंक पर नए निर्माण पर रोक लगाई थी, जिसका उल्लंघन हो रहा है।
🗣 जैन नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया राष्ट्रीय महामंत्री अजय कुमार जैन और क्षेत्रीय अध्यक्ष अविनाश कुमार जैन ने इसे धार्मिक भावनाओं का घोर अपमान बताया।
🙏 सरकार से पवित्रता बनाए रखने की अपील नेताओं ने सरकार से मांग की कि जैन समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए गिरनार की पवित्रता बनाए रखी जाए।
📢 जैन समाज एकजुट और सजग प्रदर्शन से यह संदेश गया कि जैन समाज अपनी आस्था की रक्षा के लिए एकजुट है और किसी भी अपमान को बर्दाश्त नहीं करेगा।
इस विरोध प्रदर्शन ने जैन समाज की धार्मिक अस्मिता को लेकर उसकी सजगता और एकजुटता को उजागर किया। गिरनार पर्वत जैन आस्था का केन्द्र है, और वहां पूजा पर रोक समाज की भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है। समाज ने स्पष्ट किया है कि वह अपने तीर्थस्थलों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करता रहेगा।
Source : Dainik Bhaskar

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