बड़ी सादड़ी–जैन कनेक्ट संवाददाता | राजस्थान के बड़ी सादड़ी नगर में मंगलवार को श्रमण संघीय वरिष्ठ जैन संत धर्म मुनि का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जैसे ही संत नगर में पहुंचे, श्रद्धा और भक्ति का माहौल छा गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन हेतु उमड़ पड़े। धर्मसभा में मुनिश्री ने धर्म के बाह्य और आंतरिक स्वरूपों की विस्तार से व्याख्या की और श्रद्धालुओं को आत्मिक शुद्धता के पथ पर चलने की प्रेरणा दी।
🙏 धर्म मुनि का भव्य मंगल प्रवेश जरखाना गांव से बड़ी सादड़ी तक श्रद्धालुओं ने पैदल यात्रा कर जयघोष करते हुए संत को नगर में आमंत्रित किया।
🛕 सामयिक भवन तक पदयात्रा नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए संत मंडल सामयिक भवन पहुंचे, मार्ग में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए एकत्रित हुए।
🕉️ धर्म के दो प्रकारों की व्याख्या धर्म मुनि ने धर्मसभा में बाह्य और आंतरिक धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि पूजा-पाठ के साथ संयम, त्याग और करुणा भी आवश्यक हैं।
🌼 श्रद्धा का महत्व महासती चंदनबाला के उदाहरण से मुनिश्री ने श्रद्धा की शक्ति को समझाया और इसे जीवन में अपनाने की बात कही।
⚰️ संथारा से मोक्ष का मार्ग उन्होंने समाधि मरण को जीवन का अंतिम व उच्चतम क्षण बताते हुए कहा कि यह आत्मा की मुक्ति का मार्ग है।
🌿 प्रकृति का आभार व्यक्त करें संत ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे प्रकृति का धन्यवाद करें और किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाएं।
🛐 ठाणा 4 की साध्वी का स्वागत सांवलिया पेट्रोल पंप पर साध्वी अपूर्व प्रज्ञा ठाणा 4 का भव्य स्वागत किया गया, जहां भक्तों की भीड़ उमड़ी।
🍽️ नवकारसी और गौतम प्रसादी मांगीलाल जारोली की ओर से नवकारसी का आयोजन किया गया और धर्मसभा के पश्चात गौतम प्रसादी वितरित की गई।
🎉 समाजसेवी का सम्मान हरिसिंह कंठालिया को स्थानीय समाज के पदाधिकारियों ने साफा पहनाकर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया।
🗣️ जय जिनेंद्र कहने और दान का संदेश संत ने लोगों से आग्रह किया कि वे जय जिनेंद्र कहें, दान करें, गौशालाओं में जाएं और प्रभु की वाणी को मन से सुनें।
धर्म मुनि के प्रवेश से बड़ी सादड़ी में अध्यात्म और सेवा का वातावरण जागृत हुआ। उनकी सीखों ने श्रद्धालुओं को आत्मिक उन्नति और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। यह आयोजन समाज में संयम, दया और श्रद्धा की भावना को सशक्त करता है।

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