दिल्ली में जैन मंदिर की दीवार तोड़े जाने पर बवाल, समाज का विरोध प्रदर्शन

नई दिल्ली – जैन कनेक्ट संवाददाता | राजधानी दिल्ली के शालीमार बाग स्थित 40 वर्षों पुराने दिगंबर जैन मंदिर की दीवार को पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा शनिवार को तोड़े जाने के बाद विवाद गहराता जा रहा है। मंदिर परिसर में बुलडोजर चलाकर की गई इस कार्रवाई के विरोध में रविवार को जैन समाज के सैकड़ों लोग एकत्रित हुए और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। समाज की प्रमुख मांग है कि मंदिर की दीवार का पुनर्निर्माण हो और इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए।

🧱 धार्मिक स्थल पर अपमानजनक कृत्य पीडब्ल्यूडी विभाग ने 40 साल पुराने दिगंबर जैन मंदिर की सुरक्षा दीवार को अवैध घोषित करते हुए जेसीबी से गिराया।

🛐 जैन समाज की एकजुटता सैकड़ों की संख्या में जैन श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर एकत्र होकर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।

📣 दीवार के पुनर्निर्माण की मांग प्रदर्शनकारियों ने मंदिर की टूटी हुई दीवार को दोबारा बनाने की मांग की और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अपील की।

🏛️ मुख्यमंत्री की विधानसभा में घटना यह मंदिर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की शालीमार बाग विधानसभा में स्थित है, जहां से उन्होंने चुनाव भी लड़ा था।

🤝 चुनाव में दिया था समर्थन जैन समाज ने चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को समर्थन दिया था, पर अब वही मंदिर डिमोलिशन की चपेट में आया।

🚫 बिना संवाद के डिमोलिशन समाज का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना या संवाद के बुलडोजर चलाया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

🧘‍♂️ शांति से दिया गया संदेश समाज ने स्पष्ट किया कि आस्था के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन विरोध हमेशा अहिंसक रहेगा।

📍दिल्ली के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु सिर्फ शालीमार बाग ही नहीं, बल्कि दिल्ली के अन्य क्षेत्रों से भी जैन समाज के लोग मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।

⚖️ विधिक मार्ग अपनाने की अपील लोगों ने मांग की कि यदि कोई हिस्सा अवैध है, तो मंदिर समिति को संवाद के माध्यम से समाधान करने दिया जाए।

📲 सौरभ भारद्वाज की प्रतिक्रिया आप नेता सौरभ भारद्वाज ने एक्स पर लिखा, “धार्मिक मुद्दों का समाधान बुलडोजर से नहीं होना चाहिए, मुख्यमंत्री को लोगों की बात सुननी चाहिए।”

संक्षेप में, जैन समाज ने इस घटना को केवल एक दीवार तोड़ने की कार्रवाई न मानते हुए, इसे आस्था के साथ खिलवाड़ करार दिया है। समाज का कहना है कि यदि धार्मिक स्थलों पर इस तरह की कार्रवाई बिना संवाद के होगी, तो यह सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाएगा। पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं और जैन समाज ने चेताया है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो संघर्ष और तेज होगा।

Source : Amar Ujala

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