रायपुर में दादागुरुदेव की विशेष पूजा का भव्य आयोजन

रायपुर – जैन कनेक्ट संवाददाता | रायपुर की भैरव सोसायटी स्थित सीमंधर स्वामी जैन मंदिर व जिनकुशल सूरि जैन दादाबाड़ी परिसर में अमावस्या के पावन अवसर पर दादागुरुदेव की विशेष पूजा का भव्य आयोजन किया गया। आचार्य जिनमणिप्रभ सूरीश्वरजी की प्रेरणा से आयोजित इस पूजा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर विश्व में शांति, अहिंसा और करुणा की स्थापना के लिए सामूहिक प्रार्थना की। इस आयोजन ने वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में जैन धर्म की मूल शिक्षाओं—अहिंसा, दया और ‘जियो और जीने दो’—की प्रासंगिकता को दोहराया।

🕊️ विश्वशांति हेतु दादागुरुदेव की पूजा दादाबाड़ी परिसर में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने विश्वशांति के लिए दादागुरुदेव की बड़ी पूजा कर सामूहिक जाप किया।

🪷 अहिंसा और दया का दिया गया संदेश पूजन में भाग लेने वाले श्रावक-श्राविकाओं ने जैन धर्म की मूल आत्मा—अहिंसा, करुणा और दया को जीवन में उतारने की शपथ ली।

🛕 चारों दादागुरुदेव की वेदी पर अष्टप्रकारी पूजा सर्वप्रथम चारों दादागुरुदेव की वेदी के समक्ष अष्टप्रकारी पूजा कर धार्मिक वातावरण को भावविभोर किया गया।

🧘‍♂️ मुनिवर का प्रवचन: “जियो और जीने दो” आचार्य जिनमणिप्रभ सूरीश्वर ने भगवान महावीर के संदेश को याद दिलाते हुए इसे आज की दुनिया के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।

📅 चातुर्मास 9 जुलाई से प्रारंभ आगामी चातुर्मास में राजधानी रायपुर के 10 विभिन्न स्थानों पर साधु-साध्वियों द्वारा धर्म आराधना कराई जाएगी।

📿 21 दिवसीय इक्तिसा जाप की घोषणा दादाबाड़ी में 21 दिवसीय ‘दादागुरुदेव इक्तिसा जाप’ का आयोजन होगा, जिसकी रूपरेखा 27 जून को ट्रस्ट की बैठक में तय की जाएगी।

🎶 गुरुभक्ति के भजनों से गूंजा वातावरण “जब कोई नहीं आता, मेरे दादा आते हैं” जैसे भजनों ने श्रद्धालुओं की आंखों में भक्ति की आभा भर दी।

🧡 विशेष लाभार्थियों की रही उपस्थिति पूजन के लाभार्थियों में विमल-प्रियांशु बुरड़, निर्मल-पंकज मूणत, अशोक-अरुणा कोठारी सहित कई श्रद्धालु परिवार शामिल रहे।

👨‍👩‍👧‍👦 संपूर्ण समाज की सहभागिता दादा के दीवाने ग्रुप से लेकर वरिष्ठजनों व युवाओं तक सभी ने पूजा में भाग लेकर सामाजिक एकता का परिचय दिया।

🪔 समर्पण और सेवा का भाव पूजन और आयोजनों के माध्यम से समाज ने दिखाया कि धर्म केवल साधना नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का भी नाम है।

इस भव्य आयोजन ने जैन धर्म की शाश्वत शिक्षाओं को वर्तमान समय के संदर्भ में प्रस्तुत किया और बताया कि शांति, प्रेम, दया और समभाव ही विश्व को एकजुट कर सकते हैं। रायपुर की यह पूजा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान थी, बल्कि एक वैश्विक संदेश भी।

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