माउंट आबू – जैन कनेक्ट संवाददाता | राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मोहंत श्रीवास्तव ने माउंट आबू में विश्व प्रसिद्ध दिलवाड़ा जैन मंदिर के दर्शन कर उसकी भव्यता और वास्तुकला की सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने गहरा आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि दिलवाड़ा जैसा अद्वितीय मंदिर आज तक ‘वंडर ऑफ द वर्ल्ड’ की सूची में क्यों शामिल नहीं हो पाया। उन्होंने इसे न केवल राजस्थान, बल्कि भारत की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर बताया।
मुख्य न्यायाधीश ने यह वक्तव्य मंदिर भ्रमण के दौरान व्यक्त किया, जिसमें उन्होंने मंदिर की नक्काशी, स्थापत्य और आध्यात्मिक ऊर्जा को अभूतपूर्व बताया। साथ ही उन्होंने सरकार और प्रशासन से इस दिशा में ठोस प्रयास करने की अपील की।
🏛️ दुनिया में अद्वितीय स्थान मुख्य न्यायाधीश ने दिलवाड़ा जैन मंदिर की तुलना विश्व के सात अजूबों से की और इसे वैश्विक मान्यता योग्य बताया।
📍 माउंट आबू की पहचान उन्होंने कहा कि दिलवाड़ा मंदिर माउंट आबू की आत्मा है और इसकी पहचान को वैश्विक स्तर पर प्रचारित किया जाना चाहिए।
🤔 वंडर ऑफ द वर्ल्ड में क्यों नहीं? न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि इतनी कलात्मक और ऐतिहासिक धरोहर को आज तक ‘वंडर ऑफ द वर्ल्ड’ में क्यों नहीं जगह मिली?
🪷 भगवान आदिनाथ की प्रतिमा भेंट इस अवसर पर न्यायाधीश को भगवान आदिनाथ की प्रतिमा स्मृति स्वरूप भेंट की गई।
🏞️ मंदिर की स्थापत्य कला से अभिभूत मुख्य न्यायाधीश ने मंदिर की संगमरमर नक्काशी और प्राचीन भारतीय वास्तुकला को अद्वितीय बताया।
👥 प्रशासनिक अधिकारी भी रहे उपस्थित इस अवसर पर आबू उपखंड अधिकारी, पुलिस अधीक्षक सहित अनेक अधिकारी उपस्थित थे।
📢 सरकार से की अपील उन्होंने सरकार से अपील की कि मंदिर को वैश्विक धरोहर में शामिल कराने हेतु प्रयास किए जाएं।
📸 मीडिया व प्रबंधन के साथ संवाद प्रबंधन समिति के सदस्यों और मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में उन्होंने मंदिर के संवर्धन पर बल दिया।
🧾 सर्वश्रेष्ठ धरोहर घोषित करने की मांग उन्होंने दिलवाड़ा मंदिर को भारत की आधिकारिक ‘सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय धरोहर’ घोषित करने की मांग की।
🙏 आध्यात्मिक अनुभूति मुख्य न्यायाधीश ने अपने दौरे को आत्मिक शांति और ऐतिहासिक चेतना का अनुभव बताया।
मुख्य न्यायाधीश का यह दौरा दिलवाड़ा जैन मंदिर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को नई दिशा दे सकता है। उनके विचारों से यह स्पष्ट है कि मंदिर को वैश्विक मंच पर उचित पहचान दिलाने के लिए न केवल समाज को, बल्कि सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को भी गंभीरता से कार्य करना होगा।

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