फालना में गुरुदेव धर्मचंद विजयजी और दिव्यचंद विजयजी महाराज का स्वागत

फालना-जैन कनेक्ट संवाददाता | फालना में श्री जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक तपागच्छ संघ के तत्वावधान में आयोजित भव्य चातुर्मासिक प्रवेश समारोह में आध्यात्मिक उल्लास और धार्मिक गरिमा का अनूठा संगम देखने को मिला। परम पूज्य गुरुदेव श्री धर्मचंद विजयजी महाराज (वल्लभ विहार) और खुडाला से पधारे दिव्यचंद विजयजी महाराज का मंगलमय स्वागत पूरे शहर ने श्रद्धा के साथ किया। शोभायात्रा, गुरु प्रवचन, पूजन और स्वामी वात्सल्य के साथ यह आयोजन प्रेरणादायी बन गया।

🎉 गुरुदेवों का चातुर्मासिक प्रवेश वल्लभ विहार से धर्मचंद विजयजी महाराज एवं खुडाला से दिव्यचंद विजयजी महाराज का चातुर्मास के लिए भव्य स्वागत करते हुए फालना में प्रवेश कराया गया।

🎺 संगीतमय शोभायात्रा संगीत की मधुर ध्वनि और जयकारों के साथ शोभायात्रा फालना के विभिन्न मार्गों से होकर आराधना भवन तक पहुंची।

🛕 आराधना भवन में प्रवचन कार्यक्रम गुरुदेव श्री ने आराधना भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए जीवन में संयम, साधना और सेवा की महत्ता पर प्रकाश डाला।

🙏 गुरु पूजन और कामली अर्पण प्रवचन उपरांत भक्तों ने गुरुदेव को कामली अर्पित की और विधिपूर्वक गुरु पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

🕊️ गुरुदेव द्वारा मांगलिक पाठ गुरुदेव धर्मचंद विजयजी महाराज ने भक्तों को मांगलिक सुनाकर आयोजन को आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की।

🍛 स्वामी वात्सल्य का आयोजन दोपहर में जैन संघ फालना द्वारा आयोजित स्वामी वात्सल्य में श्रद्धालुओं को आत्मीय भोजन प्रसादी दी गई।

👥 सैकड़ों श्रद्धालुओं की भागीदारी इस अवसर पर शहर एवं आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर चातुर्मास प्रवेश को ऐतिहासिक रूप प्रदान किया।

🗣️ समाजजनों की सक्रिय उपस्थिति जैन संघ अध्यक्ष अरुण चौधरी, सचिव संभव जैन सहित कई प्रमुख समाजसेवियों ने आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाई।

🌸 आस्था और उल्लास का वातावरण पूरे आयोजन के दौरान फालना शहर श्रद्धा, भक्ति और उमंग से सराबोर रहा; मंदिरों में विशेष सजावट की गई।

💫 गुरुदेवों के आगमन से मिली प्रेरणा चातुर्मास में गुरुदेवों की उपस्थिति से संघ को साधना, सेवा और संस्कारों के नव संकल्प की ऊर्जा प्राप्त हुई।

इस आयोजन ने ना केवल चातुर्मास के महत्त्व को रेखांकित किया, बल्कि समाज में अध्यात्म, संस्कृति और एकता की भावना को भी सशक्त किया। गुरुदेवों के आगमन ने फालना की धार्मिक चेतना को नवीन ऊर्जा प्रदान की।

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