मुंबई – जैन कनेक्ट संवाददाता | जैन धर्म में विशेष स्थान रखने वाला चातुर्मास बुधवार, 9 जुलाई से शुरू हो गया है। यह चार महीनों की वह विशेष अवधि होती है, जब जैन संत वर्षा ऋतु में एक स्थान पर रुककर तप, ध्यान और साधना में लीन रहते हैं। इसे ‘वर्षायोग’ या ‘चौमासा’ भी कहा जाता है। इस दौरान संत विहार नहीं करते और अनुयायी संयमित जीवन अपनाते हैं। चातुर्मास का उद्देश्य न केवल आत्मशुद्धि और साधना है, बल्कि सूक्ष्म जीवों की रक्षा भी इसमें निहित है।
🌧️ वर्षा ऋतु में विहार वर्जित जैन धर्म में जीवों की रक्षा का महत्व सर्वोपरि है। वर्षा ऋतु में भूमि पर असंख्य सूक्ष्म जीव सक्रिय रहते हैं। विहार से उनके जीवन को खतरा होता है, इसलिए साधु एक ही स्थान पर रुकते हैं।
🪔 चातुर्मास का प्रारंभ यह अवधि आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी से शुरू होकर कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तक रहती है। इन चार महीनों में साधना, पूजा, व्रत और स्वाध्याय को विशेष महत्व दिया जाता है।
🧘♂️ साधना और संयम का पर्व संत और साध्वी चातुर्मास के दौरान धार्मिक स्थलों, मंदिरों या आश्रमों में रुकते हैं। यह समय आत्मनिरीक्षण, आत्मशुद्धि और संयम के पालन का है।
📍 संतों के ठहराव के स्थान देशभर में अलग-अलग स्थानों पर प्रमुख आचार्य और मुनि चातुर्मास कर रहे हैं। सम्मेद शिखरजी, इंदौर, जबलपुर, दिल्ली, नासिक, देवास, कोलकाता जैसे शहरों में संतों की उपस्थिति देखी जा रही है।
🛕 सम्मेद शिखरजी बना आस्था का केंद्र इस वर्ष अनेक संतों ने सम्मेद शिखरजी में चातुर्मास का निर्णय लिया है। यह स्थान जैन धर्म का परम तीर्थ है और साधकों के लिए अत्यंत पूजनीय है।
🕊️ अहिंसा का संदेश चातुर्मास केवल साधुओं के लिए नहीं, अनुयायियों के लिए भी संयम, तप और आत्मिक उन्नति का अवसर होता है। यह काल जैन धर्म के मूल सिद्धांत ‘अहिंसा परमो धर्म’ की भावना को जीवन में उतारने का है।
📘 साधक और श्रावकों के लिए मार्गदर्शन संतों के सान्निध्य में श्रावक—श्राविकाएं स्वाध्याय, व्रत, उपवास और सेवा कार्यों में संलग्न रहते हैं। यह समय पूरे समाज को नैतिकता और आध्यात्मिकता से जोड़ता है।
जैन संतों का चातुर्मास केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवनशैली को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का अवसर है। तप, ध्यान, संयम और अहिंसा के माध्यम से यह पर्व आत्मिक उन्नयन का मार्ग प्रशस्त करता है। देशभर में श्रद्धालु इन चार महीनों को साधना और सेवा में समर्पित कर रहे हैं।
प्रमुख दिगंबर जैन संतों के चातुर्मास कार्यक्रम प्रस्तुत है:
संत का नाम चातुर्मास स्थान
आचार्य श्री समय सागर जी जबलपुर
आचार्य श्री वसुनंदी जी अहिच्छत्र क्षेत्र आंवला—बरेली
आचार्य श्री संभव सागर जी महाराज सम्मेद शिखरजी
आचार्य श्री आनंद सागर जी महाराज वसंतकुंज दिल्ली
आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज अहमदाबाद
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज टोंक
आचार्य श्री कुंथुसागर जी महाराज कुंथुगिरी (महाराष्ट्र)
आचार्य श्री देवनंदी महाराज जी ससंघ नमोकार तीर्थ नासिक
आचार्य श्री श्रुत सागर जी महाराज ससंघ पश्चिम दिल्ली
आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी महाराज बेलाजी
पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज वीरागोदय तीर्थ पथरिया
आचार्य श्री विशद सागर जी महाराज ससंघ सुदामा नगर, इंदौर
आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज जैन बाग सहारनपुर
आचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज ससंघ विजय नगर इंदौर
आचार्य श्री विहर्ष सागर जी महाराज उदयपुर
आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज पुष्पगिरी देवास
आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज तरुण धाम मुरादनगर
आचार्य श्री अरुण सागर जी महाराज फरीदाबाद
आचार्य श्री सौरभ सागर जी महाराज देहरादून
आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज उदयपुर
आचार्य श्री प्रमुख सागर जी महाराज कोलकाता
आचार्य श्री तन्मय सागर जी महाराज सम्मेद शिखरजी
आचार्य श्री गुणधरनंदी जी महाराज नवग्रह तीर्थ बरूर कर्नाटक
आचार्य श्री भरत भूषण सागर जी महाराज मुजफ्फरनगर यूपी
आचार्य श्री विवेक सागर जी महाराज ससंघ सम्मेद शिखरजी
आचार्य श्री वैराग्यनंदी सागर जी महाराज सम्मेद शिखरजी
साध्वियों का स्थान:
गणनी आर्यिका ज्ञानमती माताजी — रायगंज, अयोध्या
आर्यिका विशुद्धमति माताजी एवं बिज्ञाश्री माताजी — सवाई माधोपुर
आर्यिका विशिष्ट श्री माताजी — प्रतापगढ़, राजस्थान
आर्यिका आर्षमति माताजी — बड़ौत, यूपी
आर्यिका शुभमति माताजी — सम्मेद शिखरजी
आचार्यश्री विद्यासागर के शिष्यों के स्थान:
निर्यापक श्रमण मुनिश्री योगसागर जी महाराज — गुना
मुनिश्री सरलसागर जी महाराज — भोरासा, कुरवाई
मुनिश्री प्रबुद्धसागर जी महाराज — गोटेगांव
मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज — सम्मेद शिखरजी
मुनिश्री कुंथूसागर जी महाराज — पुणे
मुनिश्री आगमसागरजी महाराज — जगदलपुर
अन्य मुनि :
उपाध्याय श्री बिहसंत सागर जी महाराज — भिण्ड (म.प्र.)
उपाध्याय विभंजन सागर जी महाराज — धार (म.प्र.)
मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज — कीर्ति नगर, जयपुर
मुनि श्री आस्तिक्य सागर जी महाराज — जलगांव (महाराष्ट्र)
आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज का उदयपुर
Source : The Sootr

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