मुंबई-जैन कनेक्ट संवाददाता | विले पार्ले में ध्वस्त किए गए दिगंबर जैन मंदिर को लेकर एक महीने से चल रहे संघर्ष के बाद जैन समुदाय को बड़ी राहत मिली है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने शुक्रवार को मंदिर स्थल पर अस्थायी मानसूनी शेड लगाने की अनुमति दे दी है। यह फैसला एक अहम बैठक के बाद लिया गया, जिसमें समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ-साथ राज्य मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा भी मौजूद थे।
यह निर्णय उस समय आया जब लगातार एक महीने से मंदिर ट्रस्ट शेड लगाने की अनुमति मांग रहा था। अब यह उम्मीद जगी है कि आस्था और विश्वास के साथ इस स्थल पर शीघ्र ही एक भव्य जैन मंदिर पुनर्निर्मित होगा।
🔹 अस्थायी शेड की अनुमति BMC ने मंदिर स्थल पर अस्थायी मानसूनी शेड लगाने की अनुमति दी, जिससे श्रद्धालुओं को बारिश से बचाव मिल सकेगा।
🛕90 साल पुराने मंदिर का विध्वंस विले पार्ले के कांबलीवाड़ी स्थित 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर को 16 अप्रैल को गिरा दिया गया था।
📢 समुदाय में आक्रोश मंदिर ध्वस्तीकरण को लेकर जैन समुदाय में गहरा रोष व्याप्त हुआ और इसे अवैध करार दिया गया।
🧑⚖️ न्यायालयी प्रक्रिया से पहले कार्रवाई BMC पर आरोप है कि उसने हाई कोर्ट की सुनवाई से पहले ही मंदिर को गिरा दिया, जबकि अदालत ने मौखिक स्थगन दिया था।
🤝 राज्य मंत्री की मध्यस्थता मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा की उपस्थिति में हुई बैठक के बाद BMC ने अनुमति प्रदान की।
🙏 जन भावना की जीत लोढ़ा ने इसे जन भावना और आस्था की जीत बताते हुए पुनर्निर्माण की आशा जताई।
📝 हाई कोर्ट से तात्कालिक राहत नहीं बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंदिर को तात्कालिक राहत देने से इनकार किया, लेकिन BMC के पास आवेदन करने का सुझाव दिया।
🏛️ मंदिर ट्रस्ट का संघर्ष मंदिर ट्रस्ट एक महीने से BMC से शेड की अनुमति के लिए प्रयास कर रहा था।
📰 मामले पर मीडिया की सतत निगरानी The Free Press Journal ने इस मुद्दे को पहली बार रिपोर्ट किया और लगातार इसकी निगरानी रखी।
📅 ध्वस्तीकरण की विवादित तिथि 8 अप्रैल को कोर्ट द्वारा याचिका खारिज करने के बाद 16 अप्रैल को मंदिर गिराया गया, जबकि अपील की प्रक्रिया चालू थी।
यह फैसला न सिर्फ समुदाय की भावनाओं को सम्मान देने वाला है, बल्कि आने वाले मानसून में श्रद्धालुओं की सुविधा को भी सुनिश्चित करता है। अब समुदाय की नजरें मंदिर के पुनर्निर्माण की दिशा में केंद्रित हैं।

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