भागलपुर – जैन कनेक्ट संवाददाता | कोतवाली चौक स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में शनिवार को श्रुत पंचमी पर्व को भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया गया। यह पर्व जैन धर्म में ज्ञान की पूजा और संत वाणी की लिपिबद्ध परंपरा की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। वरिष्ठ जैन श्रद्धालु अशोक पाटनी ने बताया कि आज से लगभग 2000 वर्ष पूर्व भगवान महावीर की वाणी को पहली बार ग्रंथ के रूप में लिपिबद्ध किया गया था। इससे पूर्व श्रुत परंपरा मौखिक रूप में ही स्मरण में रहती थी।
📖 श्रुत पंचमी का आध्यात्मिक महत्व अशोक पाटनी ने बताया कि यह पर्व ज्ञान की आराधना का प्रतीक है, जब षटखंडागम जैसे दुर्लभ ग्रंथ की रचना हुई थी।
🌅 सुबह मंगल पाठ से शुरुआत प्रातः 6 बजे मंगल पाठ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसमें श्रद्धालुओं ने सामूहिक सहभागिता दिखाई।
💧 श्रुत स्कंध का हुआ अभिषेक श्रुत ज्ञान का प्रतीक स्कंध का विधिवत अभिषेक किया गया, जिसमें भक्तों ने भावपूर्वक भाग लिया।
🚩 शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब श्री दिगंबर जैन मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धालु मस्तक पर ग्रंथ धारण कर स्तुति गाते चले।
🛕 मार्गों से होते हुए मंदिर में वापसी शोभायात्रा कोतवाली चौक, डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड होते हुए पुनः मंदिर पहुंची, जहां समापन हुआ।
🌼 शांति धारा का प्रतीक अर्पण श्रद्धालु अजमेरा ने शांति धारा का प्रतीक अर्पित कर शांति और अहिंसा का संदेश दिया।
🪔 प्रथम अभिषेक का सौभाग्य राजीव पाटनी ने श्रुत स्कंध का प्रथम अभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
🎉 सिद्धक्षेत्र मंत्री ने दी शुभकामनाएं सिद्धक्षेत्र मंत्री सुनील जैन ने समाज को पर्व की बधाई देते हुए ज्ञान की साधना को प्रमुख बताया।
👥 समाजजन की गरिमामयी उपस्थिति विजय रारा, पदम पाटनी, धर्मचंद गंगवाल, जय कुमार काला सहित अनेक समाजजन समारोह में उपस्थित रहे।
🗣️ संत वाणी से प्रेरणा श्रुत पंचमी का पर्व संत वाणी के अध्ययन और श्रवण की प्रेरणा देता है, जिससे आत्मिक उन्नति होती है।
भागलपुर में आयोजित श्रुत पंचमी महोत्सव ने जैन धर्म की गूढ़ परंपराओं और ज्ञान की साधना को जीवंत कर दिया। ग्रंथों के प्रति श्रद्धा और संतों की शिक्षाओं के प्रति सम्मान ने समाज को एक नई दिशा प्रदान की।

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