बड़वाह में मुनि ललितप्रभ जी का भव्य मंगल प्रवेश

बड़वाह – जैन कनेक्ट संवाददाता | राष्ट्रीय संत मुनि ललितप्रभ जी महाराज का शनिवार को बड़वाह नगर में भव्य स्वागत हुआ। श्रीसंघ बड़वाह और श्वेतांबर जैन समाज ने धर्मप्रेम और श्रद्धा से ओतप्रोत माहौल में उनका मंगल प्रवेश कराया। मुनिश्री ने नगर के प्रमुख जैन मंदिरों में दर्शन कर शांति और संयम का संदेश दिया। उनके प्रेरणादायी प्रवचनों ने जनमानस को जीवन में संतुलन, सादगी और संतोष की राह पर चलने की प्रेरणा दी।

मंगल प्रवेश के प्रमुख पहलू 👇

🙏 श्रीसंघ ने किया मंगल स्वागत बड़वाह के श्रीसंघ और श्वेतांबर जैन समाज ने मुनिश्री ललितप्रभ जी का आत्मीय स्वागत कर धर्म आराधना का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया।

🛕 श्री संभवनाथ मंदिर में किए दर्शन इंदौर रोड स्थित श्री संभवनाथ जैन मंदिर में मुनिश्री ने प्रथम दर्शन कर मंगल प्रवेश का शुभारंभ किया।

🌼 श्री विमलनाथ मंदिर में दर्शन और प्रवचन बस स्टेशन रोड स्थित श्री विमलनाथ मंदिर में मुनिश्री ने दर्शन के पश्चात प्रवचन में धर्म और जीवन की मूल बातें साझा कीं।

🗣️ बड़वाह नाम से मिली गूढ़ सीख मुनिश्री ने कहा, “बड़वाह यानी बड़-बड़ न करें, और वाह-वाह करें।” जीवन को सहज और सरस बनाने का संदेश दिया।

😌 सुख की असली परिभाषा “सुखी वह नहीं जिसके पास सोने की चेन है, सुखी वह है जो चैन से सो रहा है,” – मुनिश्री ने जीवन के सार को सरल शब्दों में समझाया।

💡 जीवन जीने की कला का ज्ञान “जो प्राप्त है, वही पर्याप्त है” – संतोष और कृतज्ञता का भाव मुनिश्री ने समाजजनों में जाग्रत किया।

🔍 तुलना से बचने की प्रेरणा मुनिश्री ने कहा, “किसी के सुख से अपने सुख की तुलना न करें।” यह मन की शांति का मूलमंत्र है।

🧘‍♂️ शांतिसागर जी महाराज का भी प्रवचन कार्यक्रम में शांतिसागर जी महाराज ने भी उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया और आत्मशुद्धि का मार्ग बताया।

👥 समाजजनों की उमड़ी भीड़ बड़वाह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु समाजजन मुनिश्री के दर्शन और प्रवचन सुनने के लिए एकत्रित हुए।

🛣️ हैदराबाद यात्रा की ओर प्रस्थान जोधपुर में चातुर्मास के बाद मुनिश्री अब हैदराबाद यात्रा पर हैं। कुरावद के रात्रि विश्राम के बाद वे बड़वाह पहुंचे।

मुनि ललितप्रभ जी महाराज के प्रवचन केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मा को स्पर्श करने वाली अनुभूति रहे। बड़वाह में उनका मंगल प्रवेश एक धार्मिक पर्व की तरह रहा, जिसने समाज को संयम, संतोष और सेवा का संदेश दिया।

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