TCI-PRAN और जैन इरिगेशन ने एग्रीवोल्टाइक परियोजना का किया शुभारंभ

गया – जैन कनेक्ट संवाददाता | बिहार के गया जिले में एक ऐतिहासिक पहल की शुरुआत हुई जब टाटा-कोर्नेल इंस्टीट्यूट फॉर एग्रीकल्चर एंड न्यूट्रिशन (TCI), PRAN संस्था और जैन इरिगेशन सिस्टम्स ने मिलकर राज्य की पहली एग्रीवोल्टाइक्स साइट का उद्घाटन किया। यह साइट कृषि और सौर ऊर्जा उत्पादन के सामंजस्य का अनूठा उदाहरण है, जिससे एक ही भूमि पर अन्न उत्पादन और बिजली उत्पादन संभव हो सका है।

🌾 नीचे प्रस्तुत हैं इस परियोजना की प्रमुख विशेषताएँ :

🔋 खेती और सौर ऊर्जा का मेल एग्रीवोल्टाइक्स प्रणाली में खेतों के ऊपर सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिससे फसल उगाने और बिजली बनाने दोनों कार्य एक साथ किए जा सकते हैं।

🏡 नवादा गांव में साइट का निर्माण गया जिले के शेरघाटी प्रखंड के नवादा गांव में इस एग्रीवोल्टाइक्स प्रोजेक्ट की स्थापना की गई है।

🔌 20 किलोवाट की सौर ऊर्जा क्षमता इस परियोजना के तहत स्थापित सोलर पैनल 20 किलोवाट बिजली उत्पन्न करते हैं, जिससे अनाज चक्की और सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को चलाया जाता है।

👨‍🌾 किसानों की सहभागिता और स्वामित्व TCI के सहयोग से किसानों ने मिलकर इस सिस्टम का सह-वित्तपोषण किया और इसे सामूहिक रूप से संचालित कर रहे हैं।

💧 ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई से जल बचत इस प्रणाली के तहत सिंचाई के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे जल का संरक्षण हो रहा है।

💼 आयवृद्धि के नए अवसर किसान अनाज चक्की की सेवाओं के लिए शुल्क वसूल कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।

🌱 जलवायु-स्मार्ट खेती का मॉडल TCI निदेशक प्रभु पिंगली ने इसे जलवायु परिवर्तन से निपटने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने का एक स्मार्ट मॉडल बताया।

🌾 उच्च मूल्य वाली फसलों की संभावना TCI के मिलोराड प्लावसिक के अनुसार, सौर ऊर्जा सिंचाई से किसान अब उच्च मूल्य वाली फसलें उगा सकेंगे।

🧪 मिट्टी और उपज की वैज्ञानिक निगरानी कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक हारोल्ड वैन एस ने मिट्टी के नमूने लिए और भविष्य में इसके प्रभावों की निगरानी की जाएगी।

🌍 शून्य भूख, शून्य कार्बन परियोजना का हिस्सा यह परियोजना TCI की ज़ीरो हंगर, ज़ीरो कार्बन फूड सिस्टम्स योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण अनुकूल कृषि विकास है।

यह परियोजना न केवल किसानों की आय में बढ़ोतरी करेगी, बल्कि टिकाऊ विकास के नए मार्ग भी प्रशस्त करेगी। बिहार में एग्रीवोल्टाइक्स का यह पहला प्रयास भविष्य में पूरे देश के लिए एक प्रेरणास्रोत बन सकता है।

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