सागर-जैन कनेक्ट संवाददाता | मध्यप्रदेश के सागर जिले में एक किसान ने परंपरागत खेती की सीमाओं को तोड़ते हुए खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन को एक साथ मिलाकर नया इतिहास रच दिया है। 59 वर्षीय आनंद जैन ने अपने 16 एकड़ के खेत में एग्रिवोल्टैक्स तकनीक को अपनाकर न केवल सब्जियों की उपज को बनाए रखा, बल्कि प्रतिदिन 25,000 यूनिट बिजली भी ग्रिड में भेज रहे हैं। यह तकनीक खेती और बिजली उत्पादन को एक साथ करने का ऐसा तरीका है जो देशभर में किसानों के लिए एक प्रेरणा बन सकता है।
🌱खेती की ज़मीन को छोड़े बिना नवाचार आनंद जैन ने कहा, “मैं किसान हूं, अपनी ज़मीन नहीं छोड़ सकता। इसलिए सूरज की ताकत को इस तरह उपयोग किया कि खेती भी हो और बिजली भी बने।”
☀️ऊंचाई पर लगे सौर पैनल सौर पैनल खेत की फसलों के ऊपर 11 से 13 फीट की ऊंचाई पर लगाए गए हैं, जिससे नीचे पर्याप्त धूप आती है और फसलें सुरक्षित रहती हैं।
🌾 दोहरा उत्पादन: बिजली और फसल यह तकनीक फसलों को गर्मी से बचाती है, जल वाष्पीकरण को कम करती है और साथ ही बिजली उत्पादन भी सुनिश्चित करती है।
🧠 IIT रुड़की के पूर्व छात्र की अनूठी सोच आनंद जैन, जो MTech (1985) IIT रुड़की से हैं, हमेशा से समस्याओं को हल करने में माहिर रहे हैं।
🪴औषधीय पौधों से शुरुआत 1990 के दशक में उन्होंने औषधीय पौधों की खेती शुरू की, जिसने उनकी कृषि सोच को नया आयाम दिया।
🔋 घर से शुरू हुई सौर यात्रा लगभग 5 वर्ष पहले, उन्होंने अपने घर पर 7 किलोवॉट की सौर प्रणाली लगाई — यहीं से एग्रिवोल्टैक्स की प्रेरणा मिली।
🛠️ यूरोपीय डिज़ाइन से प्रेरित तकनीकी समाधान उन्होंने यूरोप की डिज़ाइन से सीखकर पैनलों को दक्षिण की ओर झुका कर 8 मीटर की दूरी पर स्थापित किया, जिससे ट्रैक्टर भी आसानी से चल सके।
🏗️ देश का सबसे बड़ा एग्रिवोल्टैक्स प्रोजेक्ट इस प्रोजेक्ट में 1,600 गड्ढों में RCC ढांचे के साथ मजबूत पोल लगाए गए, जिससे यह भारत का सबसे बड़ा एग्रिवोल्टैक्स सौर संयंत्र बन गया।
💧 जल संरक्षण और जलवायु अनुकूल खेती पैनलों की छाया से मिट्टी में नमी बनी रहती है और अलग-अलग फसलों को उनके अनुसार धूप मिलती है।
💰 सरकारी सहायता से साकार हुआ सपना 18 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को बैंक और पीएम-कुसुम योजना की सहायता से साकार किया गया। सरकार से 25 वर्षों तक बिजली खरीदने का करार भी हुआ।
संक्षेप में, आनंद जैन की यह पहल दिखाती है कि अगर नवाचार और इच्छाशक्ति हो तो खेती और विकास एक साथ संभव है। एग्रिवोल्टैक्स तकनीक न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकती है, बल्कि देश की ऊर्जा जरूरतों को भी पूरा कर सकती है, वह भी बिना कृषि भूमि की बलि दिए।

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