चेन्नई – जैन कनेक्ट संवाददाता | आर्थिक रूप से कमजोर और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चेन्नई के चूलै स्थित आदिनाथ जैन ट्रस्ट ने 14 जून 2025 को एक विशाल सेवा शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में लगभग 30 लाख रुपये मूल्य के कृत्रिम अंग, ट्रायसाइकिल, व्हीलचेयर, चश्मे, श्रवण यंत्र आदि मुफ्त में वितरित किए गए। इस अभियान से कुल 600 जरूरतमंदों को सीधा लाभ मिला, जिससे वे अपनी स्वतंत्र जीवनशैली की ओर एक बड़ा कदम बढ़ा सके।
👇 इस प्रेरणादायक सेवा आयोजन से जुड़ी मुख्य बातें:
🦿 600 लाभार्थियों को मिले मुफ्त कृत्रिम अंग इस शिविर में 600 दिव्यांग और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को विभिन्न प्रकार के कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण निःशुल्क प्रदान किए गए।
🎗️ 30 लाख रुपये की सेवाएं वितरित कुल वितरित उपकरणों की लागत लगभग ₹30 लाख थी, जो समाज सेवा के प्रति ट्रस्ट की प्रतिबद्धता दर्शाती है।
👨⚖️ मुख्य अतिथि रहे राज्य मंत्री पी.के. शेखर बाबू तमिलनाडु सरकार के धर्मार्थ और मंदिर विभाग मंत्री पी.के. शेखर बाबू ने शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और उपकरण वितरित किए।
🧑⚕️ उपकरणों में शामिल रहे सभी जरूरी सहायक वितरित उपकरणों में कृत्रिम अंग, क्लचेस, ट्रायसाइकिल, व्हीलचेयर, चश्मे, श्रवण यंत्र और वॉकर शामिल थे।
🙏 उल्लेखनीय समाजसेवियों की उपस्थिति राजेशजी जैन, मिलापचंदजी जैन, प्रकाशजी गुलेचा समेत कई प्रतिष्ठित अतिथि कार्यक्रम में मौजूद रहे।
📣 डॉ. मोहन जैन ने बताया ट्रस्ट का उद्देश्य ट्रस्ट के सचिव डॉ. मोहन जैन ने कहा कि पिछले 46 वर्षों में ट्रस्ट ने 14.5 लाख से अधिक जरूरतमंदों की मदद की है।
🌱 आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम डॉ. जैन ने कहा कि कृत्रिम अंग केवल सहायक उपकरण नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान की नई शुरुआत हैं।
🏥 चिकित्सकों को दिया गया विशेष सम्मान ट्रस्ट ने अपोलो, बिल्रोथ, लाइफलाइन, आर्टी स्कॅन जैसे प्रतिष्ठित अस्पतालों के डॉक्टरों को उनके सहयोग के लिए सम्मानित किया।
📚 समाज में जागरूकता और संवेदनशीलता का संदेश यह शिविर न केवल सेवा का कार्य था, बल्कि समाज को समावेशिता और सहानुभूति का संदेश भी देता है।
🤝 भविष्य में और भी शिविरों की योजना ट्रस्ट की योजना ऐसे और भी शिविर लगाने की है, जिससे और अधिक लोगों को लाभ मिल सके।
यह सेवा शिविर केवल उपकरणों का वितरण नहीं था, बल्कि उन सैकड़ों लोगों के जीवन में आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का बीजारोपण था। आदिनाथ जैन ट्रस्ट का यह प्रयास निश्चित ही समाज में स्थायी परिवर्तन लाने की दिशा में एक सशक्त कदम है।

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