उदयपुर में आचार्य सुनील सागर जी का भव्य मंगल प्रवेश

उदयपुर – जैन कनेक्ट संवाददाता | उदयपुर की पुण्यभूमि पर रविवार सुबह एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण साकार हुआ जब आचार्य श्री सुनील सागर जी ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश सेक्टर 11 स्थित आदिनाथ भवन में हुआ। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में गूंजते जयकारों, तिरंगा यात्रा और पुष्पवर्षा के साथ यह अवसर एक अलौकिक महोत्सव में परिवर्तित हो गया।

🌅 प्रातः 6 बजे मंगल विहार की शुरुआत आचार्य श्री ने प्राकृत भवन, सुविवि से सुबह 6 बजे ससंघ मंगल विहार प्रारंभ किया, जिसमें अनेक श्रद्धालु साथ चले।

🏛️ आदिनाथ भवन में भव्य स्वागत सेक्टर 11 स्थित आदिनाथ भवन पहुंचने पर पूरे परिसर को आचार्य श्री के स्वागत में सजाया गया था, जहां जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा।

🇮🇳 तिरंगा लेकर अहिंसा यात्रा शोभा यात्रा के दौरान जैन समाज ने देशभक्ति का परिचय देते हुए सेना और राष्ट्र को नमन करते हुए तिरंगा वितरित किया।

🚶‍♂️ 11 किलोमीटर की शोभा यात्रा पूरे शहर में 11 किमी लंबी शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और जयघोषों से आचार्य श्री का स्वागत किया।

🙏 राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने लिया आशीर्वाद पंजाब के महामहिम राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने आचार्य श्री से आशीर्वाद प्राप्त कर उदयपुर में चातुर्मास की विनती की।

🗣️ प्रेरणादायी धर्मसभा का आयोजन आचार्य श्री ने धर्मसभा में उपस्थित जनसमूह को दया धर्म एवं प्राकृत भाषा का महत्व समझाते हुए धर्म के वास्तविक स्वरूप पर प्रकाश डाला।

🕊️ “दया धर्म ही सच्चा धर्म” – आचार्य श्री उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य में दया धर्म है तो उसमें स्वतः ही अहिंसा का समावेश हो जाता है। यही जीवन का सच्चा धर्म है।

📚 प्राकृत भाषा को बताया जन-जन की भाषा प्राकृत भाषा को केवल जैनियों की नहीं बल्कि जन-जन की भाषा बताते हुए उन्होंने इसके संरक्षण की आवश्यकता बताई।

🌟 विशिष्ट सेवा सम्मान सकल दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत को “अतुल्य सेवा सारथी” सम्मान से सम्मानित किया गया।

🌼 समाज का सामूहिक स्वागत समाज के गणमान्य सदस्यों – अशोक शाह, कमलकांत झोलावत, जनकराज सोनी, भगवती रजावत आदि ने मार्ग में स्वागत किया।

उदयपुर में हुआ यह मंगल प्रवेश केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह आस्था, संस्कृति, और राष्ट्रभक्ति की त्रिवेणी था। आचार्य श्री के सानिध्य में जैन समाज ने एकता, सेवा और धर्म के मूल्यों को पुनः जाग्रत किया।

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