उदयपुर नगरी में आचार्य पुलक सागर महाराज का चातुर्मास

उदयपुर – जैन कनेक्ट संवाददाता | राष्ट्रसंत जैनाचार्य पुलक सागर महाराज इस वर्ष झीलों की नगरी उदयपुर में चातुर्मास करेंगे। उनके आगमन के साथ ही शहर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार शुरू हो गया है। सकल जैन समाज के तत्वावधान में सर्वऋतु विलास स्थित दिगंबर जैन मंदिर में उनका चातुर्मास सम्पन्न होगा। 6 जुलाई को फतह स्कूल से विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो नगर में धार्मिक उत्सव का स्वरूप धारण करेगी। इस चातुर्मास के दौरान गुरु गुणगान, ज्ञानगंगा और कलश स्थापना जैसे कई भव्य आयोजन भी प्रस्तावित हैं।

🌇 17 वर्षों बाद उदयपुर आगमन आचार्य पुलक सागर महाराज ने कहा कि 17 साल बाद उदयपुर आना उनके लिए सौभाग्य की बात है, यह नगर उनके हृदय के बेहद करीब है।

🚩 6 जुलाई को भव्य शोभायात्रा फतह स्कूल से 6 जुलाई को प्रातः 7.30 बजे मंगल प्रवेश शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेंगे।

🐘 हाथी-घोड़े और झांकियों का आकर्षण शोभायात्रा में पारंपरिक झांकियां, हाथी, घोड़े, बग्गियां और समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में सम्मिलित होंगे।

🎺 बैंड-बाजों संग जयकारों का वातावरण श्रावक-श्राविकाएं बैंड की धुन पर नाचते-गाते जयकारे लगाते हुए नगर भ्रमण करेंगे।

🏛️ नगर निगम प्रांगण में प्रवचन शोभायात्रा सूरजपोल चौराहे से होते हुए टाउन हॉल नगर निगम प्रांगण पहुंचेगी, जहां आचार्य श्री का विशेष प्रवचन होगा।

📅 12 जुलाई को गुरु गुणगान महोत्सव गुरुपूर्णिमा के अवसर पर 12 जुलाई को दोपहर 2 बजे टाउन हॉल परिसर में “गुरु गुणगान महोत्सव” का आयोजन किया जाएगा।

🪔 13 जुलाई को मंगल कलश स्थापना 13 जुलाई को दोपहर 2 बजे चातुर्मास की मंगल कलश स्थापना होगी, जिसमें मुख्य कलश की बोली भी लगाई जाएगी।

📖 20 जुलाई से 15 अगस्त तक ज्ञान गंगा चातुर्मास श्रृंखला का प्रमुख आयोजन “ज्ञान गंगा महोत्सव” 20 जुलाई से 15 अगस्त तक आयोजित होगा।

🗣️ सर्वधर्म समभाव पर बल पुलक सागर महाराज ने कहा कि वे परिवारों को जोड़ने, समभाव का संदेश देने और आत्मिक चेतना जगाने के लिए आए हैं।

🧘‍♂️ उदयपुर में चातुर्मास का विशेष महत्व महाराज श्री ने कहा कि यदि उनके वचनों से एक भी व्यक्ति का जीवन बदले तो यह चातुर्मास सफल माना जाएगा।

आचार्य पुलक सागर महाराज का चातुर्मास उदयपुर के धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जीवन में एक नवचेतना का संचार करेगा। भव्य शोभायात्रा, प्रवचनमालाएं और उत्सवों की श्रृंखला श्रद्धालुओं को आत्मिक उत्थान की ओर प्रेरित करेगी। यह आयोजन न केवल जैन समाज के लिए, बल्कि सम्पूर्ण नगरवासियों के लिए प्रेरणादायी सिद्ध होगा।

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