हरिद्वार-जैन कनेक्ट संवाददाता | पतंजलि विश्वविद्यालय में गुरुवार को दिगंबर जैन परंपरा के महान चिंतक और पूज्य संत अंतरमना आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज का भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया। यह अवसर केवल एक आध्यात्मिक संत के स्वागत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि योग, आयुर्वेद, दर्शन और भारतीय सनातन संस्कृति के अद्भुत समागम का प्रतीक बन गया। इस आयोजन में संतश्री की गूढ़ आध्यात्मिक वाणी, स्वामी रामदेव की भावपूर्ण श्रद्धांजलि और आचार्य बालकृष्ण का काव्यात्मक सम्मान, सभी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
🙏 आचार्य प्रसन्न सागर जी का भव्य स्वागत पतंजलि विश्वविद्यालय ने आत्मनिष्ठ संत का स्वागत एक भव्य आध्यात्मिक आयोजन के माध्यम से किया।
🧘 योग और आयुर्वेद के प्रति साधु का सम्मान मुनि श्री ने स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की मानवता और समाज के लिए निःस्वार्थ सेवा की सराहना की।
🌿 प्रकृति, संस्कृति और विकृति पर गूढ़ व्याख्यान आचार्य जी ने कहा कि जो जीवन प्रकृति और संस्कृति के साथ हो, वही सच्चा जीवन है — विकृति आत्मिक दरिद्रता है।
🕊️ जैन धर्म को बताया सनातन का शुद्धतम स्वरूप स्वामी रामदेव ने कहा कि आचार्य जी का आगमन जैन साधु का नहीं, बल्कि भारतीय चिंतन की आत्मा का आगमन है।
🔥 संयम और तप की जीवंत प्रतिमा रामदेव ने कहा, दिगंबर मुनि देह की सीमाओं से परे जाकर आत्मा के साथ एकाकार हो जाते हैं — यही आचार्य जी की जीवनशैली है।
📜 आचार्य बालकृष्ण का संस्कृत श्लोकों से सम्मान बालकृष्ण जी ने आठ छंदों में रचित संस्कृत काव्य के माध्यम से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
🌳 हरित क्रांति में भी भागीदारी मुनि श्री ने पतंजलि हर्बल गार्डन में वृक्षारोपण कर प्रकृति के प्रति अपने समर्पण को और स्पष्ट किया।
🔬 संस्थान की अनुसंधान गतिविधियों की सराहना आचार्य जी ने पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट का दौरा कर वैज्ञानिक अनुसंधान को सराहा।
🛕 जैन साधु-साध्वियों की गरिमामयी उपस्थिति मुनि पियूष सागर जी, अपरमत्त सागर जी, परिमल सागर जी, और अनेक साध्वियों की उपस्थिति ने आयोजन को और पावन बना दिया।
🎓 शिक्षकों, छात्रों और शोधार्थियों की आस्था पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर्स, विद्यार्थी और शोधार्थी संतश्री के दर्शन कर भावविभोर हो उठे।
यह आयोजन जैन दर्शन, योग और आयुर्वेद के समन्वय का एक अनुपम उदाहरण बना। आचार्य प्रसन्न सागर जी का त्याग और तपस्विता, पतंजलि विश्वविद्यालय के मंच से नई पीढ़ी को जीवन की सच्ची दिशा का बोध कराने वाला सिद्ध हुआ।

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