नोखा में मनाया गया आचार्य महाश्रमण जी का जन्मदिवस !

नोखा–जैन कनेक्ट संवाददाता | नोखा स्थित तेरापंथ भवन में आज तेरापंथ धर्म संघ के 11वें अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी का 64वां जन्मदिवस श्रद्धा और सादगी से मनाया गया। इस विशेष अवसर पर संत डॉ. मुनि अमृत कुमार ने आचार्य श्री के महान व्यक्तित्व, तपस्या और अहिंसा के पथ पर चलने की प्रेरणा को विस्तार से प्रस्तुत किया।

मुनि अमृत कुमार ने कहा कि आचार्य महाश्रमण जी ने अपने जीवन में 60,000 किलोमीटर की पदयात्रा कर समाज को व्यसन मुक्ति, नैतिकता और शांति का संदेश दिया है। वे करुणा और त्याग की प्रतिमूर्ति हैं। कार्यक्रम में समाज के कई गणमान्य जनों और श्रद्धालुजनों ने भाग लेकर भक्ति भाव से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

📿 आचार्य का 64वां जन्मदिवस समारोह नोखा में तेरापंथ भवन में आचार्य श्री महाश्रमण जी का जन्मदिवस भव्य श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया।

👣 60,000 किमी की पदयात्रा आचार्य श्री ने लाखों लोगों से मिलते हुए 60,000 किलोमीटर की पदयात्रा कर व्यसन मुक्ति का संदेश दिया।

🙏 करुणा और तपस्या के प्रतीक डॉ. मुनि अमृत कुमार ने उन्हें करुणा का सागर और महान तपस्वी बताया, जो संयम और सेवा के जीवंत उदाहरण हैं।

🎶 महिला मंडल द्वारा वर्धापना गीतिका तेरापंथ महिला मंडल ने समर्पित गीतिका प्रस्तुत कर वातावरण को भक्ति से भावविभोर कर दिया।

👩‍🦳 सामाजिक अग्रणियों की उपस्थिति श्रीमती सुमन मरोठी, कवि इंदरचंद बैद, अनुराग बैद, नीलम पुगलिया, मनोज घीया और सुरेश बोथरा ने भावांजलि अर्पित की।

📜 स्मृतियों का संकलन मुनि उपशम कुमार ने आचार्य श्री के साथ की गई यात्राओं और शिक्षाओं के संस्मरण साझा किए।

🎤 कार्यक्रम का प्रभावी संचालन श्री सुनील बैद ने आयोजन का संचालन करते हुए श्रद्धालुओं को आचार्य श्री की शिक्षाओं से जोड़ने का प्रयास किया।

🕯️ अनासक्त जीवन की प्रेरणा आचार्य श्री का जीवन अनासक्ति और आत्मसंयम का उदाहरण है, जो वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्त्रोत है।

🌼 धार्मिक एकता और सहयोग का संदेश समारोह ने समाज में एकता, संयम और समर्पण की भावना को मजबूत किया।

📚 नैतिक जीवन की शिक्षा आचार्य श्री की शिक्षाएं जीवन में नैतिकता, आत्मनियंत्रण और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की प्रेरणा देती हैं।

इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि आध्यात्मिकता केवल आडंबर नहीं, बल्कि आचरण और आचरण से समाज को दिशा देने की प्रक्रिया है। आचार्य महाश्रमण जी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकाशपुंज बना रहेगा।

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