कैलिफोर्निया–जैन कनेक्ट संवाददाता | विश्व शांति, सद्भाव और अहिंसा के संदेश को अंतरराष्ट्रीय पटल पर मजबूती से प्रस्तुत करने वाले जैन आचार्य लोकेश मुनि को अमेरिका में सम्मानित किया गया। कैलिफोर्निया राज्य के मिलपिटास शहर की मेयर कारमेन मोंटानो और फ्रेमोंट के मेयर राज सलवान ने संयुक्त रूप से आचार्यश्री को प्रशस्ति पत्र भेंट कर इस योगदान की सराहना की।
यह सम्मान समारोह न केवल भारतीय संस्कृति के प्रति वैश्विक सम्मान को दर्शाता है, बल्कि जैन धर्म के मूल सिद्धांतों – अहिंसा, अपरिग्रह और आत्म-संयम – की वैश्विक प्रासंगिकता को भी रेखांकित करता है।
🏆 दो अमेरिकी नगरों के मेयरों द्वारा सम्मान मिलपिटास की मेयर कारमेन मोंटानो और फ्रेमोंट के मेयर राज सलवान ने आचार्य लोकेश मुनि को विश्व शांति और अहिंसा में योगदान के लिए सम्मानित किया।
📜 प्रशस्ति पत्र के माध्यम से किया गया गौरव प्रशस्ति पत्र प्रदान कर आचार्यश्री के वैश्विक प्रयासों को आधिकारिक मान्यता दी गई।
🙏 संबोधित किया इससे पहले आचार्य लोकेशजी और महावाणिज्य दूत मासाकुई ने कनाडा स्थित जैन सेंटर ऑफ ब्रिटिश कोलंबिया के 9वें प्रतिष्ठा वर्षगांठ समारोह को संबोधित किया.
🇮🇳 भारतीय समुदाय को मिला गौरव इस सम्मान से अमेरिका में बसे भारतीय समुदाय का सिर गर्व से ऊंचा हुआ।
📢 सोशल मीडिया पर साझा की खुशी आचार्यश्री ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यह खबर साझा करते हुए आयोजन की झलकियाँ प्रस्तुत कीं।
👨💼 पूर्व राष्ट्रपति के सलाहकार भी रहे उपस्थित जो बाइडेन के सलाहकार अजय भूटोरिया की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
🏛️ नगर नियोजन आयोग के सदस्य भी रहे शामिल मिलपिटास सिटी प्लानिंग कमिशन के सदस्य दीपक भी इस ऐतिहासिक मौके पर उपस्थित रहे।
🕊️ अहिंसा का वैश्विक संदेश आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि अहिंसा और शांति ही आज की दुनिया की सबसे बड़ी ज़रूरत है।
🌐 दुनिया में भारतीय संस्कृति का विस्तार आचार्यश्री के प्रयासों से जैन सिद्धांतों की गूंज अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों तक पहुंच रही है।
💬 स्थानीय नेतृत्व ने की मुक्त कंठ से सराहना मेयरों ने कहा कि आचार्यश्री ने दुनियाभर में भारतीय मूल्यों को सम्मान दिलाया है।
🙏 धार्मिक सद्भाव की मिसाल यह आयोजन विभिन्न समुदायों के बीच संवाद और सहअस्तित्व को प्रोत्साहित करने वाला रहा।
जैन आचार्य लोकेश मुनि को मिला यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत कार्यों की प्रशंसा है, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक विरासत की सार्वकालिकता और प्रासंगिकता का प्रमाण भी है। यह घटना जैन समुदाय और संपूर्ण भारतवर्ष के लिए गौरवपूर्ण क्षण है।
Source : Bharat Express

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