आचार्य अरुण सागर जी का जन्मोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न

देवबंद – जैन कनेक्ट संवाददाता | उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले स्थित देवबंद में श्री दिगंबर जैन पारसनाथ मंदिर के सारगवाड़ा अतिथि भवन में आचार्य श्री 108 अरुण सागर जी महाराज का 63वां जन्मदिवस बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर सकल जैन समाज एवं वर्षायोग समिति के तत्वावधान में विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

सवेरे से ही मंदिर परिसर में भक्तों का आना शुरू हो गया था। अभिषेक, शांतिधारा, भक्तामर विधान और पूजन से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

नीचे जानिए इस पावन आयोजन से जुड़ी प्रमुख बातें:

🛕 मंदिर परिसर में हुआ भव्य आयोजन श्री दिगंबर जैन पारसनाथ मंदिर, देवबंद के सारगवाड़ा अतिथि भवन में आचार्य श्री का जन्मोत्सव विशेष श्रद्धा के साथ मनाया गया।

🚿 अभिषेक और शांतिधारा से हुई शुरुआत प्रातः काल आचार्य श्री के समक्ष श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा विधिपूर्वक संपन्न की गई।

📿 भक्तामर विधान और पूजन का आयोजन शास्त्रों के अनुसार भक्तामर विधान का आयोजन किया गया, जिसमें अनेक श्रद्धालु भक्तों ने भाग लिया।

🌼 अर्घ्य चढ़ाकर दी गई श्रद्धा-सुमन आचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर जी महाराज को अर्घ्य अर्पित किया गया, जिससे वातावरण धर्ममय हो उठा।

🦶 चरण प्रक्षालन और पूजा अर्चना समाज के प्रमुख जनों द्वारा आचार्य श्री अरुण सागर जी के चरणों का प्रक्षालन किया गया और आरती के साथ पूजा संपन्न हुई।

📚 शास्त्र भेंट कर किया गया सम्मान समाज की ओर से आचार्य श्री को पवित्र शास्त्र भेंट कर उनका अभिनंदन किया गया।

🧘‍♂️ प्रवचन में दिया आत्म-परिचय का संदेश अपने प्रवचन में आचार्य श्री ने आत्मा की पहचान और कर्मों से मुक्ति पाने का गूढ़ संदेश दिया।

🕊️ अहिंसा व अपरिग्रह जैसे सिद्धांतों पर बल उन्होंने अहिंसा, सत्य, ब्रह्मचर्य, अचौर्य और अपरिग्रह जैसे मूल जैन सिद्धांतों के पालन की प्रेरणा दी।

🪔 आरती थाल प्रतियोगिता का आयोजन सांझ को आरती थाल सजावट की प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें महिलाओं व युवतियों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया।

प्रश्नमंच से जाना आचार्य श्री का जीवन आचार्य श्री के जीवन पर आधारित प्रश्नमंच प्रतियोगिता ने उपस्थितों को उनके व्यक्तित्व और तपश्चर्या से परिचित कराया।

आचार्य श्री अरुण सागर जी का यह 63वां जन्मोत्सव भक्ति, ज्ञान और अध्यात्म का संगम बन गया। उनके प्रेरणादायी विचारों और तपश्चर्या से जैन समाज को नई दिशा मिली।

Source : Dainik Bhaskar

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