हिमाचल में पहली बार स्थानकवासी परंपरा का चातुर्मास : दिनेश मुनि पहुंचे नादौन

नादौन–जैन कनेक्ट संवाददाता | संयम और साधना की 54 वर्षों की यात्रा पूरी कर चुके अखिल भारतीय श्वेतांबर स्थानकवासी जैन श्रमण संघ के सलाहकार दिनेश मुनि जी महाराज इस वर्ष 2025 का अपना चातुर्मास पहली बार हिमाचल प्रदेश के नादौन नगर में संपन्न करेंगे। 340 वर्षों के इतिहास में यह स्थानकवासी परंपरा के शिष्यों का पहला चातुर्मास हिमाचल में होगा। उपाध्याय पुष्कर मुनि जी महाराज एवं आचार्य देवेंद्र मुनि जी महाराज के अंतेवासी दिनेश मुनि अपने गुरु भ्राता डा. दीपेन्द्र मुनि एवं डा. पुष्पेन्द्र मुनि के साथ इस पावन अवसर पर सम्मिलित होंगे।

🚶‍♂️ 1300 किलोमीटर की पदयात्रा दिनेश मुनि ने रानियां (हरियाणा) से लगभग 1300 किलोमीटर पैदल चलकर नादौन पहुंचकर चातुर्मास स्थल को पवित्र किया।

📜 340 वर्षों में पहली बार हिमाचल में चातुर्मास स्थानकवासी परंपरा का यह इतिहास में पहली बार हिमाचल में चातुर्मास आयोजित होगा, जो ऐतिहासिक क्षण बन गया है।

🙏 शोभायात्रा से होगा मंगल प्रवेश 2 जुलाई प्रातः 7 बजे मुनि मंडल का मंगल प्रवेश शोभायात्रा के साथ नादौन जैन स्थानक में किया जाएगा।

🗣️ प्रतिदिन प्रवचन और आत्ममंथन प्रत्येक दिन प्रातः 8 बजे से प्रवचन आयोजित होंगे, जिनमें सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर मार्गदर्शन मिलेगा।

🧘‍♂️ साधना और संयम की प्रेरणा यह चातुर्मास धर्म, तप, संयम और त्याग का सजीव उदाहरण बनकर श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा बनेगा।

📖 आधुनिक जीवन में धर्म का मार्गदर्शन प्रवचनों में मुनिगण बताएंगे कि वर्तमान युग में जीवन और परिवार का संतुलन कैसे बनाए रखा जाए।

🏛️ श्रीसंघ की विनती हुई स्वीकार हिमाचल प्रदेश के श्रावक-श्राविकाओं की वर्षों की विनती को स्वीकार कर यह अवसर प्रदान किया गया है।

🧑‍🤝‍🧑 मुनि मंडल का पावन संग सलाहकार दिनेश मुनि के साथ दो गुरु भ्राता डा. दीपेन्द्र मुनि व डा. पुष्पेन्द्र मुनि भी इस चातुर्मास में रहेंगे।

📅 चातुर्मास 1973 से कर रहे हैं नियमित दिनेश मुनि जी वर्ष 1973 से लगातार चातुर्मास कर रहे हैं, यह उनकी आध्यात्मिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

🕊️ संतों के प्रति कृतज्ञता एसएस जैन सभा और श्रीसंघ ने मुनि मंडल का आभार व्यक्त करते हुए इसे धर्म और समाज के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।

यह चातुर्मास हिमाचल प्रदेश की जैन समाज के लिए आध्यात्मिक समर्पण, तप और त्याग की ऐतिहासिक स्मृति बनेगा। नादौन की धरती पर मुनिगणों की उपस्थिति से धर्म, साधना और सेवा का एक नया अध्याय आरंभ होने जा रहा है।

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