भिलाई – जैन कनेक्ट संवाददाता | भिलाई के त्रिवेणी जैन तीर्थ, सेक्टर-6 में रविवार की संध्या को एक आध्यात्मिक वातावरण साकार हुआ जब जैन साध्वी 105 दुर्लभमति माता का मंगल प्रवेश हुआ। वे मल्लिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, रिसाली से दस साध्वी माताओं के साथ पैदल विहार करते हुए इस पवित्र तीर्थ स्थल तक पहुंचीं। इस अवसर पर जैन समाज के अनेक संगठनों और श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से स्वागत किया और पाद प्रक्षालन कर साध्वी माताओं के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
👇 आइए जानते हैं इस पावन अवसर की विशेष झलकियाँ:
🚶♀️ पैदल विहार कर पहुंचीं साध्वियाँ साध्वी दुर्लभमति माता ने दस अन्य माताओं के साथ मल्लिनाथ मंदिर, रिसाली से पैदल यात्रा कर त्रिवेणी तीर्थ में मंगल प्रवेश किया।
🪔 सामूहिक पाद प्रक्षालन पारसनाथ दिगंबर जैन महासभा, जैन मिलन ट्रस्ट और महिला क्लब की ओर से साध्वियों का विधिवत पाद प्रक्षालन किया गया।
🛕 तीर्थ के देवदर्शन साध्वी माताजी ने पार्श्वनाथ, शांतिनाथ, आदिनाथ और भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमाओं का पूजन कर मंगल दर्शन किए।
🧘♀️ धार्मिक आस्था का समर्पण साध्वीजी ने प्रवचन में कहा कि जैन धर्म के संस्कारों को आत्मसात कर संयममयी जीवन अपनाने से आत्मकल्याण संभव है।
🌸 1008 पार्श्वनाथ भगवान का अभिषेक सोमवार को मंदिर में 1008 पार्श्वनाथ भगवान का वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अभिषेक संपन्न हुआ।
📿 मंगल प्रवचन में धर्म का महत्व प्रवचन में साध्वी माता ने कहा कि परिवार के कल्याण हेतु जिन शासन के नियमों को आत्मसात करना चाहिए।
🙏 श्रद्धा और सेवा का संगम भक्तों ने इस अवसर पर मंदिर में पूजन, आरती और भक्ति भाव से साध्वियों का स्वागत कर पुण्य संचय किया।
📖 संयमित जीवन का संदेश माताजी ने संयम, पूजा, आराधना और धर्म ध्यान के नियमित अभ्यास की प्रेरणा दी।
👨👩👧👦 समाज का उत्साहपूर्ण सहभाग पारसनाथ जैन सभा सेक्टर-6 के ज्ञानचंद बाकलीवाल, प्रदीप बाकलीवाल, भारत जैन, जिनेंद्र जैन और वरुण जैन सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे।
🌷 धर्म, सेवा और साधना का अनूठा अवसर यह आयोजन जैन समाज की आस्था, धर्मनिष्ठा और साध्वी माताओं के प्रति श्रद्धा का साक्षात प्रमाण बना।
त्रिवेणी तीर्थ में साध्वी दुर्लभमति माता का यह मंगल प्रवेश न केवल एक धार्मिक आयोजन था, बल्कि समर्पण, श्रद्धा और संयम की उस परंपरा का जीवंत प्रदर्शन था जो जैन धर्म की आत्मा है। समाज के समस्त वर्गों ने इस अवसर को साध्वी माताओं के चरणों में समर्पण का क्षण मानकर आत्मिक उल्लास का अनुभव किया।

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