जैन मंदिर से मूर्तियाँ चुराने वाले चार आरोपी दोषी करार, सात साल की सजा

त्रीची – जैन कनेक्ट संवाददाता |

तमिलनाडु के तंजावुर जिले में स्थित एक जैन मंदिर से करोड़ों रुपये मूल्य की 23 मूर्तियाँ चुराने के मामले में चार आरोपियों को सात साल की सजा सुनाई गई है। यह चोरी वर्ष 2020 में अरुल्मिगु अतीश्वरस्वामी मंदिर, करंथाई में हुई थी। मूर्ति चोरी विंग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसी वर्ष मूर्तियाँ बरामद कर ली थीं। बुधवार को कुंभकोणम स्थित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

🔹 2020 में हुई थी चोरी
📅 18 जनवरी 2020 को करंथाई के जैन मंदिर के गेट तोड़कर चोरों ने प्रवेश किया और 23 धातु की मूर्तियाँ चुरा ली थीं।

🔍 बड़ी क़ीमती मूर्तियाँ थीं लक्ष्य
💰 चोरी की गई मूर्तियाँ करोड़ों रुपये की थीं और इनमें जैन तीर्थंकरों और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ शामिल थीं।

🚨 पहले दर्ज हुई थी एफआईआर
📄 मामला IPC की धारा 457(2) और 380(2) के तहत तंजावुर टाउन वेस्ट थाना में दर्ज किया गया था।

🕵️ मामला मूर्ति चोरी विंग को सौंपा गया
🔄 बाद में इस केस की जाँच की ज़िम्मेदारी विशेष मूर्ति चोरी विंग को सौंपी गई, जिसने गहराई से जांच शुरू की।

🚗 वाहन जांच में मिली पहली मूर्ति
🛑 7 मार्च 2020 को एक वाहन जांच के दौरान एक मूर्ति एक कार में पाई गई, जिससे केस में बड़ा सुराग मिला।

👮 चार आरोपी पकड़े गए
👤 एस. सरवनन, पी. शनमुगराजन, ए. रवि (तंजावुर) और वी. विजयगोपाल (नागपट्टिनम) नामक चार लोग हिरासत में लिए गए।

🏠 गोदाम से मिली बाकी मूर्तियाँ
📦 जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी सरवनन ने मूर्तियाँ अपने घर के पास एक गोदाम में छिपा रखी थीं, जहाँ से वे बरामद हुईं।

⚖️ कुंभकोणम अदालत में चला मुकदमा
🏛️ सभी आरोपियों पर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में मुकदमा चला और आरोप सिद्ध हो गए।

⛓️ सात साल की सजा और जुर्माना
📝 अदालत ने चारों आरोपियों को सात साल के कठोर कारावास और ₹2,000 जुर्माने की सजा सुनाई।

🎖️ मूर्ति चोरी विंग की प्रशंसा
👏 डीजीपी शंकर जीवाल और एडीजीपी डी. कल्पना नायक ने मूर्ति चोरी विंग की तेजी से कार्रवाई और सफल जांच की सराहना की।

इस प्रकरण में न्यायालय के सख्त निर्णय से मूर्ति चोरी जैसे संगीन अपराधों पर सख्त संदेश गया है। जैन समाज की धार्मिक आस्थाओं के साथ जुड़े इस मामले में निष्पक्ष न्याय मिलने से श्रद्धालुओं में संतोष का भाव है।

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