हस्तिनापुर – जैन कनेक्ट संवाददाता | हस्तिनापुर स्थित श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ महोत्सव के 28वें दिन भक्ति, श्रद्धा और धार्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रुत पंचमी पर्व के पावन अवसर पर मंदिर परिसर में भव्य पालकी शोभा यात्रा का आयोजन हुआ, जिसमें शास्त्र रूपी जिनवाणी मां को पालकी में विराजमान कर श्रद्धालुओं ने नगर भ्रमण कराया। इस अवसर पर 500 परिवारों की भागीदारी रही। कार्यक्रम में मुनि श्री भाव भूषण महाराज के प्रेरणादायक प्रवचनों ने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक रूप से जागृत किया।
🔹 🚩 श्रुत पंचमी पर्व की दिव्यता श्रुत पंचमी के अवसर पर जिनवाणी मां की आराधना करते हुए मंदिर परिसर में भव्य आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था।
🔹 🚶♂️ 500 परिवारों की सहभागिता शांतिनाथ महोत्सव के 28वें दिन आयोजित कार्यक्रम में 500 परिवारों ने हिस्सा लेकर सामूहिक धर्म आराधना की।
🔹 📿 जिनेंद्र भगवान का अभिषेक भगवान शांतिनाथ का अभिषेक और शांतिधारा विधिवत की गई, जिसमें राजेश जैन परिवार को यह पुण्य अवसर प्राप्त हुआ।
🔹 📖 पालकी में विराजमान हुई जिनवाणी मां जिनवाणी शास्त्र को सुसज्जित पालकी में विराजमान कर मंदिर परिसर में श्रद्धा पूर्वक शोभा यात्रा निकाली गई।
🔹 👑 इन्द्राणियों की विशेष भूमिका जिनवाणी मां को सिर पर विराजमान कर इन्द्राणियों ने शोभा यात्रा में भाग लिया। इस पुण्य कार्य में कई महिलाओं ने सहभागिता की।
🔹 🌞 मुनि श्री का सारगर्भित प्रवचन मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा – “श्रेष्ठ नारी वह है जो तीर्थंकर को जन्म देकर आत्मकल्याण कर लेती है।”
🔹 🕉️ तीर्थंकर मातृत्व की महिमा प्रवचन में तीर्थंकर की माता को सर्वोच्च बताया गया, जो मोक्षमार्ग में अग्रणी होती हैं।
🔹 🎉 आयोजन में शास्त्र प्रतिष्ठा का सौभाग्य शास्त्र प्रतिष्ठा में मोहित जैन, राजेश जैन, सुमन जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य अर्जित किया।
🔹 🙌 संघ का सहयोग रहा महत्वपूर्ण इस अवसर पर जीवेंद्र कुमार जैन, मुकेश जैन, राजेन्द्र जैन सहित अनेक पदाधिकारियों ने आयोजन में सहयोग प्रदान किया।
🔹 💫 भक्ति, श्रद्धा और अनुशासन का संगम पूरे आयोजन में भक्ति, अनुशासन और श्रद्धा की त्रिवेणी बहती रही, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।
हस्तिनापुर में आयोजित श्रुत पंचमी महोत्सव न केवल जिनवाणी मां की महिमा का स्मरण बना, बल्कि शांतिनाथ भगवान की आराधना और भक्ति के अद्भुत उदाहरण के रूप में सजीव हुआ। इस आयोजन ने श्रद्धालुओं को धर्म से जुड़ने, पुण्य अर्जन और आत्मकल्याण की प्रेरणा दी।

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