कतरास में हुआ पुण्यार्जक रथ का भव्य स्वागत,

कतरास-जैन कनेक्ट संवाददाता | झारखंड के कतरास शहर में मंगलवार को दिगंबर जैन मंदिर परिसर में पुण्यार्जक रथ का जैन समाज ने श्रद्धापूर्वक स्वागत किया। यह रथ हरियाणा के अष्टापद तीर्थ से पूरे देश का भ्रमण करते हुए अष्टधातु संग्रह कर रहा है, जिससे 151 फीट ऊंची मुनि सुव्रत स्वामी की भव्य प्रतिमा का निर्माण किया जाएगा। इस धार्मिक और पुण्यपरक पहल में स्थानीय समाज के लोगों ने भी सहभागिता निभाई और अपने घरों से अष्टधातु समर्पित किया।

🔔 दिगंबर जैन मंदिर में स्वागत समारोह कतरास के दिगंबर जैन मंदिर में पुण्यार्जक रथ का भव्य स्वागत किया गया, जिसमें समाज के महिला-पुरुषों ने उत्साह से भाग लिया।

🛕 अष्टधातु दान की उमड़ी श्रद्धा समाज के लोगों ने अपने घरों से अष्टधातु जैसे सोना, चांदी, पीतल, तांबा आदि का पुण्यार्जन हेतु समर्पण किया।

🛣️ रथ यात्रा का पावन मार्ग यह पुण्यार्जक रथ अष्टापद (हरियाणा) से निकलकर रांची, रामगढ़, कोडरमा होते हुए कतरास पहुंचा और अब गिरिडीह के लिए रवाना हो गया है।

🪔 तीन रथों से चल रही अखिल भारतीय यात्रा रथ संयोजक राकेश जैन व बबलेश जैन ने बताया कि हरियाणा से तीन रथ देशभर में अष्टधातु संग्रह अभियान चला रहे हैं।

📿 भविष्य के लिए पुण्य निवेश यह अभियान जैन अनुयायियों को धर्म, सेवा और भक्ति से जोड़ने वाला एक अभिनव प्रयास बन गया है।

🗿 मुनि सुव्रत स्वामी की भव्य प्रतिमा 151 फीट ऊंची प्रतिमा करीब 35 हजार टन वजनी होगी और अष्टधातु से निर्मित की जाएगी, जो धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगी।

📍 मधुबन व गिरिडीह होंगे अगले पड़ाव कतरास के बाद यह रथ पार्श्वनाथ मधुबन और फिर गिरिडीह की ओर अग्रसर हुआ।

👨‍👩‍👧‍👦 समाज का आत्मीय योगदान समारोह में अनिल कुमार जैन, प्रदीप जैन समेत बड़ी संख्या में जैन समाज के सदस्य मौजूद रहे और धर्मकार्य में सहभागिता निभाई।

🧭 समर्पण भाव से भरा अभियान यह रथ न केवल धातुओं का संग्रह कर रहा है, बल्कि समाज के भीतर धार्मिक चेतना और समर्पण की भावना भी जगा रहा है।

📢 सर्वसमावेशी अभियान का संदेश यह पहल धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर सभी को एकजुट करने का कार्य कर रही है — पुण्य का निर्माण और परंपरा का संरक्षण।

इस पुण्यार्जक रथ यात्रा ने कतरास में धर्म, सेवा और समर्पण की अनोखी छवि प्रस्तुत की। जैन समाज की इस ऐतिहासिक पहल से न केवल एक भव्य प्रतिमा का निर्माण होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी यह धर्मप्रेम की प्रेरणा बन जाएगी।

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